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पश्चिम बंगाल सचिवालय के बाहर वामपंथी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, छोड़े आंसू गैस के गोले

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल कोलकाता में करीब दो हजार पुलिस वाले तैनात किए गए हैं।

कोलकाता में सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते वामपंथी कार्यकर्ता। (Photo- Partha Paul)

पश्चिम बंगाल सरकार के कोलकाता स्थित सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं और पुलिस में झड़प हुई है। सीपीएम समेत अन्य वामपंथियों पार्टियों के कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे थे। पुलिस ने वामपंथी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए लाठी चार्च की और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस ने सीपीएम विधायकों सुजान चक्रवर्ती, अशोक भट्टाचार्य और तन्मय भट्टाचार्य को हिरासत में ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल कोलकाता में करीब दो हजार पुलिस वाले तैनात किए गए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार लेफ्ट फ्रंट ने ममता बनर्जी की किसान नीति और राज्य में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ बंद का आह्वान किया है। रिपोर्ट के अनुसार वामपंथी दलों ने राज्य के सचिवालय नबान्ना भवन के बाहर चार लाख कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है। सीपीएम के ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में कहा गया है कि कोलकाता के सड़कों पर लाखों कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए उतरे हैं।

सीपीएम ने “मार्च टू नबन्ना” का आह्वान किया है वहीं पार्टी की किसान इकाई आल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने ममता बनर्जी सरकार को किसानों की तरफ से एक मांग पत्र भेजा है। इस विरोध प्रदर्शन को अन्य वामपंथियों पार्टियों के किसान मोर्चों ने भी समर्थन दिया है। हिंसा की आशंका के चलते राज्य सरकार ने भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती कर रखी है। वामपंथियों पार्टियों द्वारा 27 अगस्त 2015 को किए गए ऐसे ही प्रदर्शन में काफी हिंसा  हुई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समय राज्य में मौजूद नहीं है। राज्य में भले ही ममता और वामपंथी आमने-सामने दिख रहे हों लेकिन जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए तृणमूल और लेफ्ट फ्रंट विपक्ष दलों के साझा उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं। ममता बनर्जी ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति चुनाव के मुद्देनजर दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

वीडियो- सहारनपुर हिंसा के विरोध में हजारों दलितों ने जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन, भीम आर्मी के नेतृत्व में किया प्रदर्शन

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