राशन कार्ड को गिरवीं रख महाजनों ने दिया था छोटा-छोटा कर्ज, लॉकडाउन आया तो ऐसे खुली पोल

Lockdown in India: खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिया मुल्लिक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘जब मैंने इसके बारे में सुना तो हैरान रह गया। मैंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा। हमने अधिकारियों से हर गांव की जांच करने को कहा है। मैंने अधिकारियों को पुलिस शिकायत दर्ज करने के लिए कहा।’

Gour Kalindi
सुरजामाता गांव में अपने घर में एक खाट पर लेटे हुए बीमार 80 वर्षीय गौर कालिंदी। (Express photo: Partha Paul)

Lockdown in India: झारखंड की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में अभी तक घातक कोरोना वायरस का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि ये सिर्फ कोविड-19 की कहानी नहीं है। दरअसल यहां राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बीच परिवारों की मदद करने के लिए पीडीएस (राशन कार्ड) के तहत छह महीने तक मुफ्त में राशन देने की घोषणा की। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मगर लोग कहते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं। चूंकि इन परिवारों ने सालों पहले उधार ली गई कुछ राशि के बदले अपने पीडीएस कार्ड साहूकारों को सौंप दे दिए थे।

सुरजामाता गांव में अपने घर में एक खाट पर लेटे हुए बीमार गौर कालिंदी (80) दस साल बाद वापस मिले पीडीएस कार्ड को दिखाते हैं। करीब दस साल पहले कालिंदी और उनकी पत्नी श्यामला ने तीन हजार के रुपए के बदले में ‘बंधक’ के रूप में अपना पीडीएस कार्ड साहूकार को सौंप दिया था। उन्हें एक बीमारी के इलाज के लिए उन पैसे की जरुरत थी, जो कभी खत्म ही नहीं हुई।

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इसी तरह 60 वर्षीय राधिका कालिंदी को उम्मीद है कि उन्हें लौटाए हुए पीडीएस कार्ड से लॉकडाउन में मदद मिल सकेगी। सात हजार रुपए के कर्ज के बदले में उन्होंने चार साल पहले ‘बंधक’ के रूप में अपना कार्ड दे दिया था। अधिकारियों ने बताया कि अकेले सुरजामाता गांव में 24 ऐसे परिवारों ने उनसे संपर्क किया। गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं। इनमें से ज्यादा तक दैनिक मजदूरों के रूप में काम करते हैं। इनके पास कोई जमीन नहीं है और बमुश्किल कोई संपत्ति है। बता दें कि स्थानीय राशन डीलरों द्वारा 1 अप्रैल से हर पीडीएस कार्ड धारक को 5 किलो चावल और 5 किलो आटा दिए जाने के बाद इन लोगों ने खंड विकास अधिकारी (BDO) से संपर्क किया। इसपर बीडीओ ने उन्हें लिखित शिकायत देने को कहा।

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इस बीच मामले से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि जांच जारी है, हालांकि अभी तक तक उन साहूकारों के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं जिनसे पीडीएस कार्ड वापस लिए गए हैं। झालदा के बीडीओ राजकुमार बिस्वास ने कहा कि दोनों पक्षों को ऐसा दोबारा नहीं करने का लिखित वचन देने के लिए कहा गया था।

वहीं यह बताते हुए कि पीडीएस कार्ड हस्तांतरणीय नहीं हैं खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिया मुल्लिक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘जब मैंने इसके बारे में सुना तो हैरान रह गया। मैंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा। हमने अधिकारियों से हर गांव की जांच करने को कहा है। मैंने अधिकारियों को पुलिस शिकायत दर्ज करने के लिए कहा।’

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