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चीन ने कहा- एनएसजी में भारत की एंट्री के खिलाफ नहीं हैं, उनसे दोस्‍ती है हमारी

चीन ने इस बात को खारिज किया कि वह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के खिलाफ है।

Author कोलकाता | Updated: November 5, 2016 1:51 PM
india, china, pakista, indo china, indo pak, neighbours of india, national film festival, president of india, jansatta article, jansatta editorial, jansatta news, national news in hindi, world news in hindi, international news in hindi, political news in hindi, jansattaप्रधानमंत्री की हालिया चीन यात्रा से आजकल मीडिया में भारत-चीन के रिश्तों में एक नए दौर की संभावना सुर्खियां बनी हुई है

चीन ने इस बात को खारिज किया कि वह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के खिलाफ है। कोलकाता में चीन के महावाणिज्य दूत झानवु मा ने कहा, ‘‘यह विचार सही नहीं है कि चीन एनएसजी में भारत के प्रवेश के खिलाफ है। इस बारे में भारत और चीन मिलकर काम कर रहे हैं।’’ मा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में किसी देश के प्रवेश के लिए कुछ प्रक्रियाओं की जरूरत होती है जिनका पालन किया जाना जरूरी है। यह आसान नहीं है।’’ भारत-पाक संबंधों पर चीन का रूख पूछने के बारे में उन्होंने कहा कि उनका देश तटस्थ है। चीन के महावाणिज्य दूत ने कहा, ‘‘चीन का भारत के प्रति काफी दोस्ताना रूख है। कुछ लोगों को ऐसा नहीं लगता है। निश्चित रूप से हमारे बीच मतभेद है। लेकिन साझा हित मतभेदों से ऊपर हैं।’’

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उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यावसायिक रिश्ते परस्पर लाभकारी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक जहां तक पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों की बात है तो चीन का रूख निरपेक्ष है। भारत और पाकिस्तान को बातचीत से गतिरोध दूर करना चाहिए।’’ वर्तमान में चीन और भारत के बीच एनएसजी को लेकर बातचीत चल रही है। पहले दौर की बातचीत 13 सितंबर को दिल्ली में हुई थी और तब तय किया गया था कि दूसरे दौर की बातचीत बीजिंग में होगी। इसी सिलसिले में विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमनदीप सिंह गिल (निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा) ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक वांग कून के साथ एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर बातचीत की।

बातचीत के दौरान भारत चीन को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में उसकी दावेदारी कैसे मजबूत बनती है। बातचीत के दौरान भारतीय अधिकारियों ने कहा कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर दूसरे दौर का काम है। सियोल में जून में चीन ने 48 देशों के इस समूह में भारत की सदस्यता का यह कहकर विरोध किया था कि भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है।

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