ताज़ा खबर
 

पश्चिम बंगाल: सब तरफ दुर्गापूजा की धूम, पंडालों में चीन और यूनान भी

सात साल पहले ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा पर राजनीति के रंग कुछ ज्यादा ही चटख हो गए हैं।

बंगाल में दुर्गापूजा अब पहले की तरह चार दिनों का त्योहार नहीं रही। अब तो कुछ बड़े पंडालों में दस दिनों तक लोगों का तांता लगा रहता है।

सात साल पहले ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा पर राजनीति के रंग कुछ ज्यादा ही चटख हो गए हैं। पूजा पंडालों के उद्घाटन के मामले में ममता ने अपने विरोधियों को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस बार तो पिछले तमाम रेकॉर्ड टूट गए हैं। वैसे, नेताओं की ओर से पूजा पंडालों का उद्घाटन कोई नया नहीं है। लेकिन ममता तो इस मामले में हर साल नया रेकॉर्ड बना रही हैं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास पर इस साल राज्य के विभिन्न हिस्सों से पंडालों व प्रतिमाओं के उद्घाटन के लिए लगभग 10 हजार पूजा समितियों का न्योता पहुंचा था। ममता महालया यानी नवरात्र शुरू होने के एक दिन पहले से ही पूजा पंडालों के उद्घाटन में व्यस्त हैं। पश्चिम बंगाल में अबकी छोटी-बड़ी 28 हजार समितियों ने पूजा का आयोजन किया है। इनमें से तीन हजार तो राजधानी कोलकाता और आसपास के इलाकों में ही हो रहे हैं।

थीम-आधारित आयोजनों के बढ़ते प्रचलन के मौजूदा दौर में इस आयोजन में पूरे साल के दौरान देश-विदेश में घटने वाली प्रमुख घटनाओं को पंडालों और बिजली की सजावट के जरिए उकेरा जाता है। इस बार महानगर में कहीं एशिया के सबसे बड़े इलाके सोनागाछी का नजारा दिख रहा है तो कहीं चीन का एक हिस्सा पंडाल में उतर आया है। लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद इन आयोजनों की भव्यता साल दर साल बढ़ रही है। इस साल पूजा समितियों का बजट पांच लाख से लेकर 20 करोड़ तक का है। वैसे, यह आंकड़ा तो आधिकारिक है। कई प्रमुख पूजा समितियों का खर्च तो 50 करोड़ के पार जाने की भी चर्चा है। औपचारिक रूप से पूजा शुरू होने के दिन यानी षष्ठी तक ममता रोजाना औसतन एक दर्जन पंडालों का उद्घाटन करती रही हैं। दीदी कहती हैं कि उनकी इच्छा तो तमाम पंडालों में जाने की है, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। ममता तमाम पंडालों में जाकर न सिर्फ उद्घाटन करती हैं बल्कि वहां मौजूद लोगों से भी घुलने-मिलने लगती हैं। एक पंडाल में लोगों ने जब उनसे चित्र बनाने का अनुरोध किया तो वे कागज व पेंसिल लेकर वहीं बैठ कर चित्र बनाने लगीं।

बंगाल में दुर्गापूजा अब पहले की तरह चार दिनों का त्योहार नहीं रही। अब तो कुछ बड़े पंडालों में दस दिनों तक लोगों का तांता लगा रहता है। आलम यह है कि इस बार नवरात्र शुरू होने के साथ ही पंडालों में रेकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ने लगी है। महानगर की दो सौ प्रमुख आयोजन समितियों के संगठन फोरम फार दुर्गापूजा के मुताबिक महानगर और आसपास होने वाली पूजा पर इस दफा खर्च का आंकड़ा सवा सौ करोड़ पार कर गया है। महानगर के पूर्वी छोर पर स्थित साल्टलेक के एक पूजा पंडाल में अबकी दर्शकों को चीन की झलक देखने को मिल रही है। आयोजकों ने वहां यूनान की थीम पर पंडाल तैयार किया है। कोलकाता में चीन के कौंसुल जनरल मा झान्वू कहते हैं कि इस पूजा पंडाल में दोनों देशों की संस्कृति व परंपरा का घालमेल देखने को मिल रहा है।

साल्टलेक के बीजी ब्लाक की पूजा समिति ने आयोजन से कुछ महीने पहले चीनी संस्कृति, कला और लोगों के रहन-सहन की जानकारी के लिए पांच कलाकारों को यूनान प्रांत के दौरे पर भेजा था। एक आयोजन समिति ने एशिया की सबसे बड़ी देहमंडी सोनागाछी की यौनकर्मियों के सघर्ष और सफर को ही अपनी थीम बनाया है। यौनकमिर्यों के जीवन और उनको होने वाली दिक्कतों को भित्ति चित्रों के जरिए उकेरा गया है। इसके लिए पंडाल तक जाने वाली सड़क पर लगभग साढ़े तीन सौ फुट लंबी कलाकृति बनाई गई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में रेड रोड इलाके में विसर्जन जुलूस आयोजित करने का फैसला किया था। इस मौके पर देसी-विदेशी अतिथियों को भी न्योता दिया जाता है। इस साल 23 अक्तूबर को उक्त जुलूस में महानगर की चुनिंदा 75 प्रतिमाएं शामिल की जाएंगी। इस जुलूस के कारण लोगों को कोलकाता की बेहतरीन प्रतिमाएं एक साथ देखने का मौका मिल जाता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App