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घट रही कड़वाहट! अमित शाह से ममता बनर्जी ने फोन पर की डेढ़ मिनट बात

कुछ महीने पहले तृणमूल और बीजेपी के बीच जारी तल्खी के बीच ऐसी खबरें आई थीं कि पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से ममता बनर्जी से दो बार संपर्क करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, ममता ने उनसे बात नहीं की।

गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।

आम चुनाव 2019 के दौरान बीजेपी और तृणमूल के बीच बड़ा सियासी टकराव देखने को मिला। चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एक दूसरे को खूब निशाने पर लिया। अमित शाह की बंगाल में रैली के दौरान हिंसा के बाद दोनों के बीच रिश्तों में तल्खी और ज्यादा बढ़ गई। हालांकि, अमित शाह के गृह मंत्री का पद संभालने के बाद शनिवार को दोनों नेताओं के बीच शनिवार को बातचीत हुई। माना जा रहा है कि यह दोनों नेताओं के बीच हुई पहली बातचीत है। शाह और ममता के बीच बातचीत पश्चिम बंगाल के नए गवर्नर जगदीप धनखड़ को लेकर हुई।

बता दें कि कुछ महीने पहले तृणमूल और बीजेपी के बीच जारी तल्खी के बीच ऐसी खबरें आई थीं कि पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से ममता बनर्जी से दो बार संपर्क करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, ममता ने उनसे बात नहीं की। सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि पीएमओ द्वारा फोन करने पर पहली बार बोला गया कि मुख्यमंत्री टूर पर हैं और वापस कॉल किया जाएगा। दूसरी बार भी सीएम ऑफिस से यही जवाब आया। हालांकि, ममता ने कोई कॉल नहीं किया।

अंग्रेजी अखबार टेलिग्राफ ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ‘शाह ने उन्हें पहले सुबह कॉल किया लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। बाद में उन्होंने शाह को अपने मोबाइल फोन से कॉल बैक किया और दोनों के बीच करीब डेढ़ मिनट तक बातचीत हुई।’ इसके बाद ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘मैं श्री जगदीप धनखड़ जी का स्वागत करता हूं जिन्हें बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। मुझे यह जानकारी मीडिया के जरिए मिली है। मैं उनका हमारे खूबसूरत प्रदेश में स्वागत करती हूं।’

इसके करीब 20 मिनट बाद सीएम ने दोबारा ट्वीट किया, ‘माननीय गृह मंत्री ने अभी अभी मुझसे पश्चिम बंगाल के नए गवर्नर की नियुक्ति को लेकर बातचीत की। मैंने उन्हें बताया कि मैं पहले ही नए गवर्नर का स्वागत कर चुकी हूं।’ माना जा रहा है कि पहले ट्वीट के जरिए ममता ने यह संकेत दिए कि नए गवर्नर के ऐलान से पहले उनको किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई। एक वरिष्ठ अफसर का मानना है कि गवर्नर की नियुक्ति के लिए केंद्र का राज्य से सलाह मशविरा करना जरूरी नहीं है। हालांकि, ऐलान से पहले अनौपचारिक तौर पर राज्य सरकार को जानकारी देने की परंपरा रही है।

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