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बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट-201: ममता के निवेशक सम्मेलन की कामयाबी पर उठने लगे सवाल

ममता सत्ता में आने के बाद से लगातार खासकर विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास करती रही हैं।
Author कोलकाता | January 20, 2017 03:38 am
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री प्रमुख ममता बनर्जी। PTI Photo

शुक्रवार से महानगर में शुरू होने वाले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पसंदीदा कार्यक्रम यानी बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट की कामयाबी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक तो केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के इनकार ने इसकी चमक पहले ही फीकी कर दी थी। अब रही-सही कसर कोलकाता से सटे भांगड़ इलाके में जमीन अधिग्रहण के विरोध में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत ने पूरी कर दी है। इससे पहले आयोजित ऐसे दो निवेशक सम्मेलनों के बाद हजारों करोड़ के निवेश के बावजूद हकीकत यह है कि उनमें से ज्यादातर निवेश प्रस्ताव अब भी फाइलों में बंद है। ममता बनर्जी चाहे जितने दावे करें, छह साल पहले सत्ता में आने के बाद राज्य में कोई बड़ा निवेश नहीं हो सका है। यही वजह है कि अबकी बदले हालात में इस सम्मेलन की कामयाबी पर सवाल उठने लगे हैं। सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी करेंगे।

बीते साल ऐसे सम्मेलन के बाद भी मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश का प्रस्ताव मिला है। उन्होंने कहा था कि उनके शासन में किसी भी उद्योगपति को परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा और उनको यहां औद्योगिक निवेश के लिए शांत व सकारात्मक माहौल मुहैया कराया जाएगा। लेकिन ममता की बातों को उद्योगपतियों ने शायद एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया। प्रस्ताव आने और उद्योग लगने में काफी अंतर होता है। यह बात मुख्यमंत्री भी अच्छी तरह से जानती हैं। हालांकि, उनका दावा है कि राज्य में बहुत सारे निवेश हुए हैं।  जानकार कहते हैं कि भले ही यह पूर्व की तरह ही बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मेलन हो, लेकिन 2016 की तुलना में 2017 का सम्मेलन कई मामलों में भिन्न है, क्योंकि 2016 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे, लिहाजा ममता ने कई बातें उद्योगपतियों के अलावा मतदाताओं को शीशे में उतारने के लिए भी कहीं थी। मतदाता भले ही ममता की बातों में फंस गए हो और तृणमूल को 2011 की तुलना में 2016 में अधिक ताकत दी हो, लेकिन उद्योगपतियों ने ममता की बातों पर तकरीबन यकीन नहीं किया। इसके अलावा 2017 का बंगाल ग्लोबल बिजनेस सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कड़क फैसले से ममता बनर्जी तिलमिलाई हुईं हैं। ऊपर से उनकी पार्टी के दो सांसदों (सुदीप बंद्योपाध्याय व तापस पाल) को चिटफंड मामले में सीबीआइ ने गिरफ्तार कर आग में घी डालने का काम किया है।

अगर यह कहा जाए कि केंद्रीय मंत्रियों की शिरकत के बावजूद विगत में हुए सम्मेलन फीके रहे तो कुछ गलत नहीं होगा, और इस बार तो केंद्र सरकार का कई भी मंत्री नहीं पहुंच रहा है। ऐसे भी उद्योगपतियों के बीच इस संदेश को जाने से कोई नहीं रोक सकता है कि राज्य व केंद्र सरकार के बीच छत्तीस का आंकड़ा है, जो उद्योग के लिए हर हाल में प्रतिकूल होता है। मालूम हो कि नोटबंदी की वजह से पहले कहा जा रहा था कि सम्मेलन की तारीख में फेरबदल हो सकता है। खबर यह भी आई कि मुख्यमंत्री इस सम्मेलन को फरवरी या फिर मार्च में आयोजित करने का मन बना रही हैं। नोटबंदी की वजह से सम्मेलन की तारीखों के बदलाव की चर्चाओं का दौर चलते ही राज्य के उद्योग व वित्तमंत्री अमित मित्र ने साफ किया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें कई देशों के तीन हजार से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।

ममता सत्ता में आने के बाद से लगातार खासकर विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास करती रही हैं। इसके लिए वे कई बार सिंगापुर से लेकर लंदन और इटली से जर्मनी तक का दौरा कर चुकी हैं। लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। उन्होंने जर्मनी में बीएमडब्लू समेत कई और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे बंगाल में निवेश करने की अपील की। इतना ही नहीं, टाटा से भी बंगाल में निवेश करने का कई बार अनुरोध किया। लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ।ममता के विरोध की वजह से सिंगुर से टाटा को जाना पड़ा था। इसी वजह से निवेशकों का बंगाल की ओर रुझान कम हो गया। अब तो सिंगुर की जमीन भी किसानों को लौटाई जा चुकी है, लेकिन ममता से लेकर उनके उद्योग मंत्री तक कहते आ रहे हैं कि राज्य में उद्योग के लिए जमीन की कमी नहीं है। एक हजार एकड़ का एक भूखंड पड़ा है, जिस पर भारी उद्योग लगाया जा सकता है।बदले हालात में इस सम्मेलन से राज्य को कितना लाभ होता है और कितने उद्योगपति राज्य में निवेश की इच्छा जताते हैं, यह तो 21 जनवरी को ही पता चल पाएगा।

 

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