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पश्चिम बंगाल: अब सुरक्षित व सम्मान के साथ होगा पशु शवदाह

पशु प्रेमी कहते हैं कि राज्य सरकार पशु शवदाह को लेकर सचेष्ट तो दिख रही है, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि इस योजना को कब और कितनी जल्दी धरातल पर उतारा जाता है।

Author कोलकाता। | June 6, 2018 04:16 am
कोलकाता नगर निगम, विभिन्न नगरपालिकाओं के अलावा शहर के कई श्मशान घाटों के संचालन करने वाली कई स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों से भी बातचीत जारी है

शंकर जालान

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में सड़े और मृत पशुओं के मांस की आपूर्ति की वारदातों ने जहां धन-लोभियों की मानसिकता को उजागर किया, वहीं यह प्रश्न भी खड़ा किया कि आखिर ऐसी शर्मनाक स्थिति के पैदा होने की मुख्य वजह क्या रही? जानकार कहते हैं कि मृत पशुओं को दफनाने या जहां-तहां फेंक देने के कारण ही ऐसी भयानक स्थिति उत्पन्न हुई। जानकारों का मानना है कि मृत पशुओं को जलाने की पर्याप्त व्यवस्था रहती तो शायद ऐसा कुछ नहीं होता। जानकारों की राय को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार भी इस दिशा में तत्पर होती दिख रही है, इसलिए उसने मृत पशुओं को जलाने के लिए दाह स्थल बनाने पर विचार-विमर्श कर रही है।

बंगाल सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस बाबत कोलकाता नगर निगम, विभिन्न नगरपालिकाओं के अलावा शहर के कई श्मशान घाटों के संचालन करने वाली कई स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों से भी बातचीत जारी है और अगर ऐसा होता है तो पश्चिम बंगाल देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां मृत पशुओं के सुरक्षित दाह संस्कार के लिए जगह विशेष की व्यवस्था होगी। इस बारे में कोलकाता नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के मेयर परिषद के सदस्य अतिन घोष ने जनसत्ता को बताया कि भगाड़ों में फेंके गए मृत पशुओं के अवैध कारोबार के अंतरराष्ट्रीय लिंक पर लगाम कसने के लिए अब पशुओं के दाह संस्कार स्थल बनाने पर बातचीत जारी है।

घोष कहा कि इस पहल को जल्द से जल्द क्रियान्वित करने के लिए राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम ने विभिन्न नगर निगम व नगरपालिकाओं को नोटिस दी है। वहीं, मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृत पशुओं के लिए दाह स्थल बनाने के निर्देश के बाद नगर निगम व नगरपालिकाओं को नोटिस दी है। नोटिस का जवाब आने के बाद संबंधित और जानकारों से राय-मशविरा कर इस दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा। दक्षिण चौबीस परगना जिले के राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका में मृत पशुओं के लिए राज्य पहला शवदाह गृह तैयार होगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही जगह का चयन किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शवदाह के लिए केएमडीए की तरफ से जल्द डीपीआर तैयार किया जाएगा। उसके बाद अगले तीन-चार महीने में शवदाह गृह बनकर तैयार हो जाएगा। एक शवदाह गृह के बनाने में कितने का खर्च आएगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल इसका आकलन नहीं किया गया है।

कहना गलत नहीं होगा कि खराब या कम गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री परोसने की घटना समय-समय पर सामने आती रही है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर सड़े और मृत पशुओं के मांस की आपूर्ति का शायद यह पहला मामला है। इस मामले को किसी भी नजरिए से सही नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन इस बात पर कुछ हद तक संतोष किया जा सकता है कि इस तरह का अविश्वसनीय मामला सामने आने के बाद राज्य मृत पशुओं के शवदाह के लिए सचेष्ट होता दिख रहा है। वैसे भले ही मुख्यमंत्री अपनी सफाई में यह कह रही हों कि दूसरे राज्यों से पशु बंगाल में लाए जाते हैं और सरकार अकेले सबकुछ नहीं देख सकती, लेकिन फिर भी इस प्रकरण ने राज्य सरकार की निगरानी व्यवस्था की तो पोल खोल ही दी है। ऐसी घटनाएं दोबारा न घटे, इसलिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा मृत पशुओं को अब जला दिया जाएगा ताकि उन्हें भगाड़ में फेंकना न पड़े।

वहीं, पशु प्रेमी राज्य सरकार के इस फैसले को जायज बता रहे हैं। इन लोगों का मत है कि मृत पशुओं को दफनाने की कई जगह व्यवस्था है, इतने बड़े राज्य में पशुओं के शवदाह की कोई व्यवस्था नहीं रही, इस वजह से इस तरह का यह भयानक मामला सामने आया और धन लोभियों ने मानवता को तार-तार कर दिया। पशु प्रेमी कहते हैं कि राज्य सरकार पशु शवदाह को लेकर सचेष्ट तो दिख रही है, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि इस योजना को कब और कितनी जल्दी धरातल पर उतारा जाता है।

  • ’दक्षिण चौबीस परगना जिले के राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका में मृत पशुओं के लिए राज्य पहला शवदाह गृह तैयार होगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही जगह का चयन किया जाएगा। अगले तीन-चार महीने में शवदाह गृह बनकर तैयार हो जाएगा
  • ’कोलकाता नगर निगम, विभिन्न नगरपालिकाओं के अलावा शहर के कई श्मशान घाटों के संचालन करने वाली कई स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों से भी बातचीत जारी है

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