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देवी पर भारी ‘दीदी’, ज्यादातर पूजा कमेटियां तृणमूल के कब्जे में

मूर्ति के मामले में देवी (दुर्गा) के बदले दीदी (ममता बनर्जी) भारी पड़ रही है। चार दिवसीय दुर्गोत्सव के दौरान आयोजक पंडाल व लाइटिंग के जरिए कन्याश्री व सबुज साथी के बहाने तृणमूल का प्रचार करने में लगे हैं।

Mamta Banerjee, gujarat election, gujrat election results, gujrat chunva, election results, gujarat election result, gujarat chunav, gujarat chunav result, gujarat election result 2017, election resultGujarat Election Result 2017: पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी। (File Photo)

शंकर जालान

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध दुर्गोत्सव में बीते चार-पांच साल के दौरान जिस तरह से राजनीति का रंग चढ़ा है मानो उसने चंडी पाठ की परिभाषा ही बदल दी है। उत्तर से दक्षिण तक लगभग सभी पूजा कमेटियों के प्रमुख राज्य में सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस के सांसद, मंत्री, विधायक व पार्षदों हैं। दुर्गापूजा पर जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा जमाया है उसे देखते हुए ‘शक्ति’ रूपेण संस्थिता की जगह अगर ‘तृणमूल’ रूपेण संस्थिता का उच्चारण किया जाए तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी। एकडालिया एवरग्रीन पूजा कमेटी व बालीगंज सार्वजनीन दुर्गोत्सव के कर्ताधर्ता राज्य के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी हैं। ठीक इसी तरह, त्रिधारा सम्मिलनी के कोलकाता नगर निगम में मेयर परिषद के सदस्य देवाशीष कुमार, सिंघी पार्क पूजा समिति में राज्य के बिजली मंत्री शोभन चट््टोपाध्याय, खिदिरपुर 25 पल्ली दुगार्पूजा में राज्य के शहरी विकास मंत्री फरिहाद हाकिम, बेहला नूतन दल पूजा कमेटी में कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी, चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव में पूर्व विधायक संजय बक्सी, सुरुचि (अलीपुर) में राज्य सरकार में मंत्री अरूप विश्वास, पाथुरियाघाटा पांचेरपल्ली में पार्षद इलोरा साहा, सांतेरपल्ली दुगार्पूजा व हिंदू महासभा में विधायक स्मिता बक्सी, जोड़ासांकू सार्वजनिक दुगार्पूजा में राजेश सिन्हा, बांसतला दुगार्पूजा में विष्णु शर्मा, यूथ एसोसिएशन में पूर्व विधायक दिनेश बजाज, रवींद्र कानन में राज्य सरकार में मंत्री शशि पांजा, श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में विधायक सुजीत बोस, मछुआबाजार दुर्गापूजा में तपन राय और अहिरीटोला दुर्गापूजा में पार्षद विजय उपाध्याय न केवल सर्वेसर्वा बल्कि अध्यक्ष, मुख्य संरक्षक जैसे पदों पर आसीन भी हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि देवी पर ‘दीदी’ यानी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख भारी पड़ रही है।

जानकारों की मानें तो राजनीति में धर्म का आना जितना अनुकूल है, धर्म में राजनीति का प्रवेश उतना ही प्रतिकूल भी है। समझदार लोग यह भी कहते हैं कि नाव जब तक पानी में तब तक आप सुरक्षित हैं, लेकिन पानी के नाव में आते ही आप पर खतरा मंडराने लगता है। हाल में संपन्न नगरपालिका चुनाव में अभूतपूर्व जीत हासिल करने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने विपक्षी दलों में सेंधमारी प्रारंभ की और फिर दुर्गोत्सव पर करीब-करीब अधिकार जमा लिया।शहर की बड़ी और चर्चित पूजाओं को तृणमूल कांग्रेस के सांसद, मंत्री, विधायक व पार्षदों का संरक्षण प्राप्त तो है ही, कहीं-कहीं तो पार्टी प्रमुख को खुश करने की जुगत पर तृणमूल नेताओं द्वारा दीदी (ममता बनर्जी) पर आधारित प्रकाश व्यवस्था तक की जा रही है। दुर्गोत्सव में हर बार प्रतिमा, पंडाल और बिजली सज्जा के जरिए आयोजक बीते साल की प्रमुख घटनाओं को रेखांकित करते रहे हैं। हुगली जिले के सिंगुर स्ट्रीट नैनो कारखाना, ट्रेन हादसा, करगिल युद्ध, भारतीय क्रिकेट की उपलब्धियां, नारी शक्ति, पर्यावरण, नोबल सिटी पर राज्य में न केवल दुगार्पूजा आयोजित होती रही है, बल्कि चर्चित भी रही है, लेकिन इस बार पूजा पर जहां तृणमूल का राजनीतिक रंग चढ़ गया है। वहीं मूर्ति के मामले में देवी (दुर्गा) के बदले दीदी (ममता बनर्जी) भारी पड़ रही है। चार दिवसीय दुर्गोत्सव के दौरान आयोजक पंडाल व लाइटिंग के जरिए कन्याश्री व सबुज साथी के बहाने तृणमूल का प्रचार करने में लगे हैं।

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