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‘रॉबिनहुड’ से लेकर ‘टाइगर ऑफ बंगाल’ तक मिल चुके हैं नाम, ममता के धुर विरोधी अधीर रंजन चौधरी का यूं बढ़ा कांग्रेस में कद

मंगलवार (18 जून, 2019) को यूपीए की मीटिंग के बाद अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में कांग्रेस का नेता नियुक्त किया गया। आलाकमान के इस फैसले के बाद उनके घर पर पटाखे, गुलदस्ते और माला के साथ स्वागत किया गया।

Author नई दिल्ली | June 19, 2019 1:26 PM
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में पार्टी नेता होंगे।

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को जब साल 2007 में यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया तब संगठन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने दिल्ली के अशोका होटल में डिनर का आयोजन किया। इसका मकसद था सांसदों की प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कराना। तब वहां मौजूद अन्य लोगों के मुताबिक सोनिया गांधी ने अधीर रंजन चौधरी का परिचय ‘टाइगर ऑफ बंगाल’ के रूप में कराया। हालांकि चौधरी ने अपनी राजनीतिक पहचान बनाने के लिए जो आक्रामकता दिखाई, उसे देखते हुए वह गलत नहीं है, पहले उन्होंने सीपीआई(एम) से लड़ाई लड़ी और अब प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित राज्य मशीनरी से लड़ रहे हैं। अब वह पूरी दृढ़ता के साथ बहरामपुर के अपने ‘गढ़’ डटे हुए हैं।

बता दें कि मंगलवार (18 जून, 2019) को यूपीए की मीटिंग के बाद अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में कांग्रेस का नेता नियुक्त किया गया। आलाकमान के इस फैसले के बाद उनके घर पर पटाखे, गुलदस्ते और माला के साथ स्वागत किया गया। सदन में कांग्रेस नेता नियुक्त किए जाने पर चौधरी ने कहा, ‘मुझे बिल्कुल भी इसकी उम्मीद नहीं थी। आज सुबह ही मुझे इस बात की जानकारी मिली। इसलिए आप कह सकते हैं कि मैं थोड़ा स्तब्ध हूं। मगर मैं खुद पर विश्वास करते हुए लोकसभा का सम्मान करूंगा और पार्टी के बारे में धारणा को सुधारने के लिए पुरी कोशिश करूंगा।’

खास बात है कि पांच बार के सांसद चौधरी ने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत जेल से की थी। साल 1996 में पश्चिम बंगाल के नबाग्राम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1999 में उन्होंने पहली बार बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता। 2019 में प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने लेफ्टिनेंट (राज्य मंत्री सुभेंदु अधकारी) को मुर्शिदाबाद जिले में तीन लोकसभा सीटें, मुर्शिदाबाद , बहरामपुर और जंगीपुर जिताने का जिम्मा सौंपा। हालांकि सुभेंदु अधकारी इस मामले में सिर्फ आंशिक रूप से सफल रहे चूंकि वह जंगीपुर और मुर्शिदाबाद से टीएमसी उम्मीदवारों को चुनाव जिताने में सफल रहे मगर बहरामपुर में ‘रॉबिन हुड’ को नहीं हरा सके।

बहरामपुर…वो संसदीय क्षेत्र जहां चौधरी ने स्थानीय स्तर पर दंबग आदमी के रूप में नाम कमाया। उन्होंने अपनी निरंतर उपस्थिति और सर्तकता से मतदाताओं के दिलों में जगह बनाई। यहां कांडी में एक चाय की दुकान के मालिक ने याद करते हुए बताया कि चौधरी ने कैसे 1988 के कटरा मस्जिद दंगों के दौरान उनकी और उनकी साथी की सुरक्षा को सुनिश्चित किया। उस वक्त वह विधायक भी नहीं थे।

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