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कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में डॉक्टर को दिखाया राक्षस, हुआ बवाल

इसके कारण देश में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और बढ़ सकती है।
Author कोलकाता | September 26, 2017 13:45 pm
दुर्गापूजा की प्रतीकात्मक तस्वीर। (स्रोत-एक्सप्रेस फोटो अमित मेहरा)

कोलकाता के मशहूर दुर्गा पूजा पंडाल में डॉक्टरों को राक्षस दिखा कर इस पंडाल के आयोजक बड़ी मुसीबत में पड़ गए हैं। शनिवार को पंडाल में डॉक्टरों को राक्षस की भूमिका में दिखाया गया, जिसके बाद सिटी मेडिकल कम्यूनिटी ने इसका विरोध किया। वहीं शाम होते-होते सूबे की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी के आदेश के बाद मोहम्मद अली पार्क के दुर्गा पंडाल से डॉक्टरों को राक्षस के रूप में दिखाना बंद कर दिया गया। इस मामले में विवाद खड़े होने के बाद खुद को फंसता देख पंडाल के आयोजकों ने बोर्ड से कहा कि फर्जी डॉक्टर को राक्षस के रूप में दिखाया गया था जिसका मतलब मेडिकल समुदाय को अपमान करना नहीं था। हम फर्जी डॉक्टरों का तिरस्कार कर रहे थे और जो रियल हैं उनका सम्मान करते हैं।

वहीं बोर्ड द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद भी गुस्साए डॉक्टरों को शांत नहीं कराया जा सका और उन्होंने पंडाल के संयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और सोशल मीडियो के जरिए अपना विरोध व्यक्त किया। कई डॉक्टरों के संगठनों ने पंडाल द्वारा उन्हें राक्षस दिखाए जाने पर कहा कि यह मेडिकल कम्यूनिटी के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। इसके कारण देश में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और बढ़ सकती है। पूर्व विधायक और पूजा कमिटी के चेयरमैन दिनेश बजाज ने कहा कि हमें अहसास हो गया है कि लोग इसकी सराहना नहीं कर रहे हैं लेकिन हमारा मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं थे। उन्होंने कहा कि रविवार को पूजा का उद्घाटन फिर से किया जाएगा क्योंकि इस विवाद के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को ढक दिया गया था।

बजाज ने कहा कि हर साल की तरह ही हमने इस बार भी लोगों में सोसायटी के अच्छे और बुरे चेहरे को दिखाने की कोशिश की थी। पिछले काफी समय से फर्जी डॉक्टरों की तदाद बढ़ जिसका नुकसान आम लोगों को होता है इसलिए हमने उन फर्जी डॉक्टरों को राक्षस के रूम में जनता को दिखाना चाहा था। वहीं बंगाल और अन्य मेडिकल संगठनों ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि अगर वे फर्जी डॉक्टरों को राक्षस दिखाना चाहते थे तो वे ऐसा पहले भी कर सकते थे लेकिन इस बार ही क्यों किया गया।

देखिए वीडियो

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  1. Sidheswar Misra
    Sep 24, 2017 at 3:20 pm
    बिना आवश्यकता के जांच वह भी वह जहा कमीशन तय .सत्य कडुवा .डाक्टर को भगवन का दर्जा इंसानो ने दिया .डाक्टरों ने उसे धन कमाने में उपयोग किया .जब डाक्टरों को अपने पर भरोषा नहीं है इलाज कर रहे है कह रहे है भगवान पर छोड़ दो .इस देश में बाबा आस्था के नाम पर ,डाक्टर इलाज के नाम पर जी रहे है .
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