अगर-मगर और छिपी लहर

बंगाल के सियासी मैदान में ‘छिपी लहर’ के समीकरण हमेशा से चौंकाते रहे हैं। दूसरी ओर, चुनावी गणित के कुछ तय पैमाने हैं, जिनका हर चुनाव में दोहराव दिखता है।

Prime Ministerबंगाल में चुनावी सभा को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो।

बंगाल के सियासी मैदान में ‘छिपी लहर’ के समीकरण हमेशा से चौंकाते रहे हैं। दूसरी ओर, चुनावी गणित के कुछ तय पैमाने हैं, जिनका हर चुनाव में दोहराव दिखता है। नया यह हुआ है कि इस चुनाव में छह कारक उभर कर सामने आए हैं, जो चुनावी दिशा तय कर रहे हैं। इन कारकों से छिपी लहर के पैमाने कुछ हद तक स्पष्ट हो रहे हैं।

बंगाल में पांच चरण के चुनाव हो चुके हैं। चुनावी समीकरण लगभग साफ हैं। मुद्दे भी स्पष्ट हो गए हैं। मुद्दों के आधार पर सियासी ध्रुवीकरण भी हो रहा है। लेकिन छिपी लहर के समीकरण का कारक अक्सर सामने आया है और ध्रुवीकरण को प्रभावित होते देखा गया है। 2001 के विधानसभा चुनाव में माना गया था कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन होगा। तब की विपक्ष में रहीं ममता बनर्जी के बारे में कहा गया था कि वे सरकार बना लगें।

माना जा रहा था कि वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ छिपी लहर (अंडर करेंट) है और प्रतिष्ठान विरोधी लहर का रंग गाढ़ा होगा। तब वामो के नेताओं ने तृणमूल एवं कांग्रेस गठबंधन का उपहास उड़ाया था। तब मतदान बाद के सर्वे (एक्जिट पोल) में ममता की सरकार आती बताई गई थी। लेकिन वाममोर्चा की सरकार लौटी। जाहिर है, छिपी लहर वामो के साथ थी और कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन को लोगों ने नकार दिया था।

2016 के चुनाव में कांग्रेस-वामो का गठबंधन बना और कहा गया कि तृणमूल कांग्रेस को तगड़ी चुनौती मिल रही है। लेकिन नतीजे अलग रहे। तृणमूल कांग्रेस 211 सीटों के साथ सत्ता में लौटी और चुनौती दे रहा गठबंधन 77 सिमट गया। बंगाल के चुनाव का एक और गणित है, जो इस बार के समीकरणों को प्रभावित करता दिख रहा है। वह है भाजपा को मिलने वाले मतों का आंकड़ा। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 6.14 फीसद मत मिले थे। 2011 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 4.06 फीसद रह गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 17.02 फीसद वोट मिले। लेकिन बढ़त का यह उफान 2016 के विधानसभा चुनाव में 10.28 तक गिरकर सिमट गया। 2019 में भाजपा के वोट 40.25 फीसद तक पहुंच गए और यह पार्टी बंगाल में असली परिवर्तन के नारे के साथ सत्ता की दावेदारी करने लगी है। भाजपा के इस आंकड़े में छिपी लहर का करिश्मा छिपा है।

फोन टैपिंग का मुद्दा

बंगाल के चुनाव में एक के बाद एक नेताओं के कई आॅडियो टेप सामने आए हैं। ताजा आॅडियो क्लिप कूचबिहार के सीतलकूची कांड को लेकर भाजपा ने जारी किया है, जिसमें ममता बनर्जी की आवाज होने का दावा किया गया है। इससे सियासी तापमान बढ़ गया है। ममता ने आरोप लगाया है कि उनका फोन टैप किया जा रहा है और वह इस मामले की आपराधिक अन्वेषण विभाग (सीआइडी) से जांच कराए जाने का आदेश देंगी। इस मामले को लेकर भाजपा नेता चुनाव आयोग पहुंचे हैं और ज्ञापन सौंप कर आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस ने खुद यह टेप लीक किया है और ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप मढ़ा है।

तृणमूल प्रमुख का साफ कहना है- मैं जासूसी संबंधी इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल किसी को नहीं छोड़ूंगी। मुझे पता चल चुका है कि इसके पीछे कौन है। भाजपा ने शुक्रवार को एक कथित आॅडियो क्लिप जारी किया, जिसमें बनर्जी सीतलकूची से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार से कथित तौर पर यह कहती सुनाई दे रही हैं कि वह 10 अप्रैल को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ)की गोलीबारी में मारे गए चार लोगों के शवों के साथ रैलियां करें।

तृणमूल कांग्रेस ने आॅडियो क्लिप को ‘फर्जी’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कभी कोई बात नहीं हुई। इससे पहले भाजपा के नेताओं ने ममता बनर्जी का एक कथित आॅडियो टेप जारी किया था, जिसमें वे नंदीग्राम इलाके के एक भाजपा नेता को अपने लिए काम करने को कह रही थीं। उस आॅडियो क्लिप को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं नेएक सुर में कहा था कि किसी पुराने साथी से संपर्क करना गलत नहीं। वह आॅडियो टेप मुद्दा नहीं बन पाया था।

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