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महिला मतों से धराशायी सियासी समीकरण

विधानसभा चुनाव की जंग जैसे-जैसे दक्षिण बंगाल के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ी है, वैसे-वैसे कई पुख्ता सियासी समीकरण धराशायी दिख रहे हैं।

chief Ministerलोगोंं को फुटबॉल दिखातीं मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी । फाइल फोटो।

विधानसभा चुनाव की जंग जैसे-जैसे दक्षिण बंगाल के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ी है, वैसे-वैसे कई पुख्ता सियासी समीकरण धराशायी दिख रहे हैं। पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण के लिए 31 सीटों पर मंगलवार को मतदान हुआ। चौथे चरण में 10 अप्रैल को 44 सीटों पर वोट पड़ेंगे।

कुल 75 सीटें हावड़ा, हुगली, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के कुछ जिलों से हैं। इन इलाकों में ‘बाहरी’ और महिला अस्मिता का मुद्दा जिस तरह से मतदाताओं के बीच हावी हुआ है, उससे महिला मतदाताओं का ध्रुवीकरण दिख रहा है।

महिला मतदाताओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीतियां भी बदलती दिख रही हैं- खासकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की और बदलाव की पुरजोर दावेदार भारतीय जनता पार्टी की। अपनी हर सभा और प्रचार अभियान में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के तमाम नेता महिला सुरक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं और बंगाल को भाजपा शासित राज्यों की तुलना में सुरक्षित बता रहे हैं। दरअसल, बंगाल में महिलाओं और बुजुर्ग मतदाताओं को अमूमन चुप्पा मतदाता माना जाता है। अतीत में हुए बदलावों में इन मतदाताओं की भूमिका अहम रही है।

इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल- दोनों ही दलों ने महिलाओं के बढ़-चढ़कर लुभावने वादे किए हैं। लेकिन जनसभाओं में अब नेताओं के भाषण मुद्दा बन रहे हैं और उस आधार पर ध्रुवीकरण भी दिख रहा है। ममता बनर्जी के लिए भाजपा नेताओं द्वारा जिन शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, उन्हें तृणमूल कांग्रेस मुद्दा बना रही है। हाथ लग रहे नए हथियारों के जरिए तृणमूल कांग्रेस बंगाल में राजनीतिक हिंसा और अन्य आरोपों को भोथरा करने में जुटी है।

तीसरे चरण में जिन 31 सीटों पर मंगलवार को मतदान हुआ, उनमें वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में महज सात फीसद भाजपा को मिले थे। जबकि, माकपा को 37 फीसद वोट मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट 37 फीसद हो गया, जबकि वामपंथी दलों का हिस्सा महज 8.33 फीसद ही रह गया।

इसके बावजूद भाजपा 31 में से सिर्फ 2 सीटों पर ही बढ़त बना सकी। ये दोनों हुगली जिले की पुड़शुड़ा और गोघाट सीटें थीं। तृणमूल कांग्रेस ने 2016 में 31 सीटों में से 29 पर जीत हासिल की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने इन 29 सीटों पर अपना वर्चस्व कायम रखा था। हुगली जिले की तारकेश्वर विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट पर वरिष्ठ पत्रकार स्वपन दासगुप्ता मैदान में हैं। यहां भाजपा ने ताकत झोंकी है।

बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में तीन जिलों हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों पर कुल 205 प्रत्याशी मैदान में हैं। तीसरे चरण के मतदान में दक्षिण 24 परगना जिले की 16 सीटों, हुगली की आठ तथा हावड़ा की सात सीटें शामिल हैं। इन सीटों को टीएमसी का गढ़ माना जाता है।

हावड़ा में आमता सीट को उत्सुकता से देखा जा रहा है। यहां से कांग्रेस के दो-बार के विधायक असित मित्र रहे हैं, जो अपने सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं। यहां हिंदूवादी संगठन हिंदू संहति के प्रमुख और भाजपा के उम्मीदवार देवतनु भट्टाचार्य और टीएमसी के सुकांत पाल के बीच कड़ी टक्कर है।

दरअसल, तीसरे और चौथे दौर में जिन इलाकों में चुनाव हैं, उनमें से हुगली को छोड़कर बाकी सभी इलाकों में भाजपा कमजोर रही है। खासकर दक्षिण 24 परगना जिले में तो वह काफी कमजोर है। यह तृणमूल का गढ़ माना जाता रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी इसी जिले की डायमंड हार्बर सीट से सांसद हैं।

दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों पर तीन चरणों में मतदान हो रहा है, इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। पहले चरण में चार और दूसरे चरण में 10 सीटों पर एक अप्रैल, तीसरे चरण में 16 पर मंगलवार को मतदान हुआ। बाकी 11 सीटों पर 10 अप्रैल को वोटिंग होगी।

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