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दार्जीलिंग में हालत खराब: होटलों ने ग्राहकों से कहा- खाली कीजिए, नहीं है खाना

पर्यटक दार्जीलिंग से निकलने के लिए गाड़ियों का इंतजार कर रहे थे लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद भी उन्हें कोई गाड़ी नहीं मिली।

Author दार्जीलिंग | June 17, 2017 5:55 PM

दार्जीलिंग में हालात और भी ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। दार्जीलिंग छुट्टियां बिताने के लिए पर्यटकों के लिए बेहतरीन जगह है। अचानक दार्जीलिंग बंद के कारण वहां पहुंचे कई पर्यटक काफी परेशान हो रहे हैं क्योंकि वहां पहुंचने से पहले वे नहीं जानते थे की दार्जीलिंग के हालात कैसे हैं। बंद के कारण दार्जीलिंग के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि होटलों के मालिकों ने भी अपने ग्राहकों से कह दिया कि यहां से चले जाएं क्योंकि उन्हें खिलाने के लिए होटलों के पास खाना नहीं है। वहीं शुक्रवार की बात करें तो चौक बाज़ार के पास पर्यटकों का हुजूम लगा हुआ था। पर्यटक दार्जीलिंग से निकलने के लिए गाड़ियों का इंतजार कर रहे थे लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद भी उन्हें कोई गाड़ी नहीं मिली।

इस बारे में जब कुछ पर्यटकों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वे सिलिगुड़ी जाने के लिए करीब 6-7 घंटे से गाड़ी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिल रहा। द हिन्दु के अनुसार कोलकाता के सॉल्ट लेक के रहने वाले टिथी मुखोपाध्याय ने कहा कि हमारे साथ दो बच्चे हैं और दो बुजुर्ग भी हैं लेकिन हमारे पास खाने के लिए कुछ बिसकुट ही हैं और हम 6 घंटे से गाड़ी का इंतजार कर रहे हैं। दार्जीलिंग में देश के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं विदेश से भी पहुंचे पर्यटक यहां पर फंसे हुए हैं। इस बंद के कारण कई पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात मे पर्यटक न तो अपने घर वापस जा पा रहे हैं और न ही होटल वाले उन्हें खाने के लिए पर्याप्त खाना दे पा रहे हैं।

आपको बता दें कि जीजेएम ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया। यहां पर बंद के अलावा छिटपुट हिंसा की भी घटनाएं हुईं है जिसके बाद पूरे दार्जीलिंग में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यह सुरम्य पहाड़ी इलाका इन दिनों बेहद अशांत है। जीजेएम समेत दार्जीलिंग में रसूख रखने वाले क्षेत्रीय दलों तथा राज्य सरकार के बीच ठनी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक फैसला टकराव का कारण बना। उन्होंने राज्य के सभी स्कूलों में बांग्ला की अनिवार्य पढ़ाई का आदेश जारी किया। दार्जीलिंग मुख्यत: नेपाली-भाषी गोरखा लोगों का इलाका है। राज्य सरकार के आदेश पर यहां तीखी प्रतिक्रिया हुई। नाफरमानी का स्वर तेज हुआ। नतीजतन, राज्य सरकार को दो कदम पीछे हटना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्ला की अनिवार्य पढ़ाई का आदेश दार्जीलिंग में लागू नहीं होगा। हैरत की बात है कि राज्य सरकार के इस स्पष्टीकरण के बावजूद विरोध-प्रदर्शन बंद नहीं हुए। उलटे राज्य सरकार के उस आदेश का विरोध जल्दी ही अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में तब्दील हो गया। दार्जीलिंग के हालात पर सुरक्षाकर्मी काबू करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को सुरक्षाकर्मियों पर पथरावा किया, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबल ने उनके ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़ दिए। पर्यटकों का मन मोह लेने वाली इस जगह पर लगातार तीन दिन से प्रदर्शन जारी है।

देखिए वीडियो 

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