अपनी ही सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने SC पहुंचा कलकत्ता हाईकोर्ट, जानिए पूरा मामला

एक केस में सुनवाई के दौरान खराब कनेक्टिविटी पर सख्त टिप्पणियां करने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और कोर्ट प्रशासन के खिलाफ ही आदेश पारित कर दिया था।

Narda Case, Hearing
कोलकाता हाईकोर्ट। (फाइल फोटो)

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अपने ही एक सिंगल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य के फैसले पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने अपने सामने लंबित एक केस को डिविजन बेंच को ट्रांसफर करने पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और कोर्ट प्रशासन की आलोचना की थी। जस्टिस सब्यसाची ने कहा था कि इस तरह की प्रैक्टिस को बढ़ावा देना गलत है। कहा कि मुख्य न्यायाधीश के पास अधिकार अधिक हैं, लेकिन वे सर्वाधिकारी नहीं हैं।

दरअसल एक केस में सुनवाई के दौरान खराब कनेक्टिविटी पर सख्त टिप्पणियां करने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस और कोर्ट प्रशासन के खिलाफ ही आदेश पारित कर दिया। 16 जुलाई को जिस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ने कनेक्टिविटी को लेकर टिप्पणी की थी, उसे मुख्य न्यायाधीश ने डिविजन बेंच को ट्रांसफर कर दिया। इसे लेकर ही उन्होंने मुख्य न्यायाधीश और कोर्ट प्रशासन के खिलाफ आदेश पारित किया था। जस्टिस भट्टाचार्य ने सोमवार को अपने फैसले में कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश या फिर मुख्य न्यायाधीश रोस्टर बनाने के अधिकारी होते हैं और वह कोर्ट का प्रशासन तय करते हैं, लेकिन वह रातोंरात किसी मामले को दूसरी बेंच या जज को सौंप सकते हैं, यह उनके अधिकार में है या नहीं, इस पर संदेह है।

इससे पहले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों को पत्र लिखा है, जिसमें उच्च न्यायालय ने नारदा मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका को एक खंडपीठ के समक्ष एक रिट याचिका के रूप में सूचीबद्ध करने के तरीके पर आपत्ति जताई है।

आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 407 के तहत विचाराधीन स्थानांतरण याचिका को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 17 मई को सीबीआई द्वारा अदालत को भेजे गए एक ईमेल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वाईजे दस्तूर द्वारा किए गए एक उल्लेख के आधार पर लिया था।

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