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ममता बनर्जी और केन्द्र में तकरार की वजह से अरुण जेटली नहीं गए कोलकाता, बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के थे चीफ गेस्ट

सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान से मिले दिशा-निर्देश के मुताबिक ही जेटली ने कोलकाता के इस बड़े इवेंट से खुद को अलग किया है।
वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के साथ भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह। (PTI Photo)

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज (शुक्रवार को) पश्चिम बंगाल सरकार को करारा झटका दिया है। उन्होंने बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट के तीसरे एडिशन में शामिल होने से इनकार कर दिया है। जेटली ही इस समिट के चीफ गेस्ट थे। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार और ममता बनर्जी सरकार के बीच रिश्तों मेंई खटास की वजह से ही वित्त मंत्री ने कोलकाता दौरा रद्द किया है। इससे पहले जेटली का इस कार्यक्रम में पहुंचना निर्धारित था।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान से मिले दिशा-निर्देश के मुताबिक ही जेटली ने कोलकाता के इस बड़े इवेंट से खुद को अलग किया है। माना जा रहा है कि भाजपा की बंगाल इकाई भी जेटली पर दबाव बना रही थी कि वो इस समिट में शामिल न हों।

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे तीन लाइन के एक विनम्र पत्र में जेटली ने कहा है कि वो पंजाब चुनावों में प्रचार की जिम्मेदारी की वजह से व्यस्त हैं, इसलिए वहां कोलकाता में आयोजित ग्लोबल बिजनेस समिट में चीफ गेस्ट नहीं बन सकते हैं। इसके बाद बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कई बार जेटली को मोबाइल पर फोन कर अनुरोध किया कि वो समिट के चीफ गेस्ट बनने को अपनी मंजूरी दें और उसमें शामिल हों लेकिन जेटली ने इनकार कर दिया।

हाल ही में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच रिश्तों में तनातनी बढ़ गई थी जब तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों तापस पाल और सुदीप बंदोपाध्याय को रोज वैली घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके जवाब में राज्य सरकार ने भी एक रिश्वतखोरी के मामले में राज्य भाजपा के बड़े नेता जयप्रकाश मजूमदार को गिरफ्तार करवा दिया था।

गौरतलब है कि ममता सत्ता में आने के बाद से लगातार विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास करती रही हैं। इसके लिए वे कई बार सिंगापुर से लेकर लंदन और इटली से जर्मनी तक का दौरा कर चुकी हैं। लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। उन्होंने जर्मनी में बीएमडब्लू समेत कई और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे बंगाल में निवेश करने की अपील की। इतना ही नहीं, टाटा से भी बंगाल में निवेश करने का कई बार अनुरोध किया लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ।ममता के विरोध की वजह से सिंगुर से टाटा को जाना पड़ा था। इसी वजह से निवेशकों का बंगाल की ओर रुझान कम हो गया।

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