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मजदूरी करते हुए पति-पत्नी दे रहे 12वीं की बोर्ड परीक्षा, बेटा भी उसी एग्जाम हॉल में दे रहा इम्तिहान

पैसे की तंगी की वजह से बलराम के बेटे बाहर प्राइवेट ट्यूशन करते हैं फिर वहां से जो पढ़कर आते हैं वो अपने मां-बाप को भी पढ़ाते हैं।
बलराम मंडल की उम्र 42 साल है तो उसकी पत्नी कल्याणी 32 साल की है। ये दोनों दसवीं पास हैं।

यूं तो पढ़ने या कुछ नया सीखने की कोई उम्र नहीं होती लेकिन जब बेटा 18 साल का हो और 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहा हो तब उसी के साथ बोर्ड परीक्षा में मां-बाप दोनों का शामिल होना और साथ-साथ एक ही कमरे में परीक्षा देना न केवल लोगों को हौसला देता है बल्कि इस बात को भी बल देता है कि आप जब चाहें तब सफलता आपके कदम चूम सकती है। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के उत्तर पतिकबाड़ी गांव के रहने वाले बलराम मंडल अपनी पत्नी कल्याणी मंडल और 18 साल के बेटे बिप्लब मंडल के साथ जिले के बहिरगाछी हाई स्कूल में इन दिनों परीक्षा दे रहे हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, परिवार के तीनों सदस्य एक ही परीक्षा केन्द्र पर एक ही कमरे में परीक्षा दे रहे हैं। 18 साल के बिप्लब मंडल ने कहा कि हमलोग परीक्षा हॉल में आपस में प्रतियोगी हैं। हमलोगों में बेहतर कौन करता है, इसकी प्रतियोगिता है। ये सभी लोग जिले के धंताला स्थित हाजरापुर हाई स्कूल के छात्र हैं। इन सभी ने पिछले दो साल तक लगातार सभी क्लास किए हैं। इन लोगों ने बांग्ला, अंग्रेजी, इतिहास, शिक्षा, संस्कृत और दर्शन शास्त्र को परीक्षा के विषय के रूप में चुना है।

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बलराम मंडल की उम्र 42 साल है तो उसकी पत्नी कल्याणी 32 साल की है। ये दोनों दसवीं पास हैं। दोनों ने साल 2013 और 2014 में रविन्द्र मुक्तो विद्यालय से दसवीं की परीक्षा पास की थी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक बलराम मंडल के पास कुल डेढ़ एकड़ जमीन है जिस पर वो सब्जी उगाते हैं। कभी-कभी वो दूसरों की खेतों में मजदूरी भी करते हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि बलराम में पढ़ने की लगन है, इसलिए वो सुबह में जल्दी जागकर खेत का काम निपटाकर जल्दी घर वापस आ जाते हैं और पढ़ने लगते हैं। कल्याणी कहती है कि वो कुछ बकरियां चराती हैं। जब बकरी चर रही होती है तब वो पेड़ के नीचे अपनी पढ़ाई करती हैं, वो समय बर्बाद नहीं करती हैं। वो कहती हैं कि उनकी शादी बलराम से उस वक्त हुई थी जब वो आठवीं में पढ़ती थी।

बलराम मंडल के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, जब वो नौवीं में पढ़ते थे। वो पढ़ना चाहते थे लेकिन गरीबी की वजह से नहीं पढ़ सके और गृहस्थी का कामकाज संभाल लिया। फिलहाल तीनों लोग 10 घंटे से ज्यादा की पढ़ाई कर रहे हैं। इनकी इंगलिश कमजोर है इसलिए बाहर से उसकी पढ़ाई करते हैं। पैसे की तंगी की वजह से बलराम के बेटे बाहर प्राइवेट ट्यूशन करते हैं फिर वहां से जो पढ़कर आते हैं वो अपने मां-बाप को भी पढ़ाते हैं।

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