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एके 47 रायफल तस्करी मामले में बंगाल सिलीगुड़ी के बागडोगरा पुलिस छावनी से मुंगेर पुलिस ने एक जवान को दबोचा

मुंगेर पुलिस ने एके 47 रायफल तस्करी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी बागडोगरा सेना छावनी से एक जवान नियाबुल रहमान उर्फ गुल्लो को दबोचा है।

तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

मुंगेर पुलिस ने एके 47 रायफल तस्करी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी बागडोगरा सेना छावनी से एक जवान नियाबुल रहमान उर्फ गुल्लो को दबोचा है। उसे गिरफ्तार कर इतवार को मुंगेर लाया गया है। यह मुंगेर के वरदह ग़ांव का ही वाशिंदा है। और शमशेर का बड़ा भाई है। शुक्रवार को पुलिस ने शमशेर के घर पर 15 घंटे की तलाशी कर तीन एके 47 रायफल व खाली मैगजीन बरामद किया था। फिर उसे भी गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मुंगेर एसपी बाबू राम ने सोमवार को बताया कि नियाबुल रहमान की गिरफ्तारी 2009 में थाना मुफ्फसिल में दर्ज एक नौजवान को गोली मारने के के मामले में की गई है। मगर एके 47 राइफलें तस्करी मामले में भी पुलिस इसे रिमांड पर ले पूछताछ करने की तैयारी कर चुकी है। समशेर से पूछताछ के बाद यह शक के दायरे में है। और इसके खिलाफ पुलिस को पक्के सबूत मिले है।

एसपी ने बताया कि नियाबुल सेना का रिटायर फौजी है। नौकरी के दौरान यह कश्मीर , लखनऊ और दूसरे महत्वपूर्ण सेना के ठिकानों पर तैनात रहा है। फिलहाल यह बागडोगरा फौजी छावनी के हथियार डिपो (एफएडी) में बतौर कांट्रेक्ट पर गार्ड बहाल है।

एसपी के बताया कि छानबीन के दौरान यह बात सामने आई है कि दरअसल नियाबुल रहमान ने ही अपने भाई समशेर को जबलपुर आयुध कारखाने के आर्मर पुरुषोत्तम कुमार रजक से मिलवाया था। पुरुषोत्तम ही बेकार हुई एके 47 को सुधार कर इन लोगों को बेचने देता था। जिसके एवज में इसे चार से पांच लाख रुपए मिलते थे। और ये बाजार में नक्सलियों , बदमाशों व आतंकियों को बीस लाख रुपए में बेचते थे। भागलपुर रेंज के आईजी सुशील खोपड़े के मुताबिक इस गिरोह के और सदस्यों को दबोचने के लिए जबलपुर और मुंगेर पुलिस सूचनाएं आपस में साझा कर रही है।

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