पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव चर्चा में है। योजना यह है कि राज्य सचिवालय अब हावड़ा स्थित नवान्न से वापस कोलकाता के ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाए। यह वही नवान्न है, जो ममता बनर्जी के 15 साल के शासन में 13 साल तक सत्ता का केंद्र रहा था।

बीजेपी का कहना है कि सरकार बनने के बाद नया मुख्यमंत्री नवान्न की बजाय फिर से राइटर्स बिल्डिंग से काम करेगा। इसी को लेकर बुधवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कार्यवाहक मुख्य सचिव दुश्यंत नारियाला से नवान्न में मुलाकात भी की। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नई सरकार के गठन के बाद सचिवालय को वापस कोलकाता लाने की योजना की जानकारी दी गई।

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी की योजना है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण शनिवार सुबह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हो। इसके तुरंत बाद नया मुख्यमंत्री कोलकाता के बीच स्थित राइटर्स बिल्डिंग में जाकर अपना कामकाज संभालेगा। हालांकि अभी तक बीजेपी ने अपना मुख्यमंत्री चेहरा आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया है।

राइटर्स बिल्डिंग को लेकर बीजेपी की सोच

बीजेपी लंबे समय से राइटर्स बिल्डिंग को फिर से राज्य सत्ता का केंद्र बनाने की बात करती रही है। पार्टी का मानना है कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि बंगाल की ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक सत्ता का केंद्र है। समिक भट्टाचार्य ने कहा कि 2021 से ही पार्टी इस बात पर जोर देती आ रही है कि सरकार राइटर्स बिल्डिंग से ही चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम फैसला नए मुख्यमंत्री के हाथ में होगा।

नवान्न क्यों बना था नया सचिवालय

राइटर्स बिल्डिंग लगभग ढाई सौ साल पुरानी इमारत है, जो लंबे समय तक सत्ता का केंद्र रही। आजादी के बाद यह पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य सचिवालय बना रहा और 2013 तक यहीं से प्रशासन चलता था। ममता बनर्जी ने 2011 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ यहीं ली थी, लेकिन बाद में उन्होंने सचिवालय को हावड़ा के नवान्न में शिफ्ट करने का फैसला किया। सरकार ने इसके लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से राइटर्स बिल्डिंग के पुनर्निर्माण की योजना बनाई थी।

उस समय ममता बनर्जी ने कहा था कि यह इमारत अब सुरक्षित नहीं रह गई है। उनके अनुसार फायर और आपदा विभाग की रिपोर्ट में इसे “टिंडरबॉक्स” यानी आग पकड़ने के लिए बेहद संवेदनशील बताया गया था। इसी वजह से अस्थायी रूप से सचिवालय को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि यह शिफ्टिंग पूरी तरह अस्थायी मानी गई थी, लेकिन बाद में नवान्न ही स्थायी सत्ता केंद्र बन गया।

राइटर्स बिल्डिंग का अधूरा पुनर्निर्माण

पुनर्निर्माण के दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राइटर्स बिल्डिंग के बीच में बनी दो एनेक्सी इमारतों को तोड़ दिया था। इसके बाद काम धीमा पड़ गया। पहले इस इमारत में लगभग 3 लाख वर्ग फीट का क्षेत्र था, जो घटकर करीब 2.5 लाख वर्ग फीट रह गया। यह जगह 8 से 10 सरकारी विभागों और मुख्यमंत्री कार्यालय को समायोजित करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

PWD अधिकारियों के अनुसार अगर नई सरकार तुरंत यहां शिफ्ट करना चाहती है तो फिलहाल केवल ब्लॉक 1 और 2 का उपयोग किया जा सकता है। मुख्यमंत्री कार्यालय दूसरे मंजिल पर चलाया जा सकता है, जहां काम लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि पहली मंजिल पर स्थित पुराने सीएमओ के हिस्से की मरम्मत में अभी करीब छह महीने और लग सकते हैं। इसी बीच बुधवार को कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने राइटर्स बिल्डिंग का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था व चल रहे पुनर्निर्माण कार्य का जायजा लिया।

ऐतिहासिक इमारत, जो सत्ता का गवाह रही है

राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 1777 में हुआ था। इसे थॉमस लियोन ने डिजाइन किया था और उस समय यह रिचर्ड बारवेल के अधीन था, जो वॉरेन हेस्टिंग्स के गवर्नर जनरल रहने के दौरान काउंसिल के सदस्य थे।

शुरुआत में यह निजी इमारत थी, लेकिन 1857 के विद्रोह से तीन साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे खरीद लिया। इसके बाद यह कंपनी के क्लर्कों का दफ्तर बन गया। 1906 के आसपास इस इमारत को नया रूप दिया गया। इसमें ग्रीको-रोमन शैली का पोर्टिको जोड़ा गया और इसकी लाल रंग की बाहरी दीवारें इसे और भी भव्य बनाती हैं।

कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके में स्थित यह इमारत लंबे समय तक ब्रिटिश शासन और फिर स्वतंत्र भारत में बंगाल सरकार की प्रशासनिक गतिविधियों की गवाह रही है। आज राइटर्स बिल्डिंग केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गई है। बीजेपी इसे फिर से सत्ता का प्रतीक बनाना चाहती है, जबकि अभी भी इसका पुनर्निर्माण पूरा नहीं हुआ है। नई सरकार के आने के बाद यह तय होगा कि प्रशासन नवान्न में ही चलता रहेगा या फिर एक बार कोलकाता की ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग राज्य सत्ता का केंद्र बनेगी।

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की शानदार जीत के बाद राज्य में हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP), कोलकाता पुलिस कमिश्नर और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज के डायरेक्टर जनरल के साथ-साथ सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SPs) और पुलिस अधिकारियों को लगातार पेट्रोलिंग करने का आदेश दिया। पूरी खबर को पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक