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मंदिर में मीट फेंके जाने की अफवाह के बाद सांप्रदायिक तनाव, भारी सुरक्षाबल तैनात

पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में शुक्रवार (2 मार्च) को होली के पर्व पर मंदिर में मांस फेंकने की अफवाहों से तनाव फैल गया। घटना दत्तापुकुर के चलताबेरिया इलाके के मंदिर की बताई जा रही है। लोगों ने रास्ता जाम कर नारे लगाए, लेकिन किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है।

मामला बदुरिया से 40 किलोमीटर के फासले का है जहां पिछले साल हुए सांप्रदायिक संघर्ष में एक शख्स की जान चली गई थी। (Express File Photo/Sahil Walia)

पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में शुक्रवार (2 मार्च) को होली के पर्व पर मंदिर में मांस फेंकने की अफवाहों से तनाव फैल गया। घटना दत्तापुकुर के चलताबेरिया इलाके की है। मंदिर में मांस फेंकने की अफवाहों के चलते लोगों ने रास्ता जाम कर दिया और नारेबाजी की, लेकिन किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक रेपिड एक्शन फोर्स (आएएफ) को मौके पर रवाना कर दिया गया और इलाके में धारा 144 के तहत कर्फ्यू लगा दिया गया। राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब हालात काबू में हैं और इलाके में शांति कायम हो रही है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल को वहां लगाया गया है। हालांकि पुलिस अधिकारी मंदिर में मांस फेंके जाने की खबर की पुष्टि नहीं कर सके। मामला बदुरिया से 40 किलोमीटर के फासले का है जहां पिछले साल हुए सांप्रदायिक संघर्ष में एक शख्स की जान चली गई थी।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि इस साल 14 जनवरी को भी इस प्रकार के छोटे झगड़े हुए थे। इससे पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलाके को बांग्लादेश की सीमा से सटे होने के कारण होली के अवसर पर संवेदशनसील मानते हुए पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने को कहा था। उन्होंने कहा था कि शरारती तत्व त्योहार के मौके पर परेशानी पैदा करेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश और राजस्थान से बांग्लादेश में की जा रही पशु तस्करी को रोकने के लिए कहा था।

पिछले वर्ष मई में एक नाबालिग शख्स की अपमानजनक फेसबुक पोस्ट वायरल होने पर भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके बदुरिया और बसीरहाट में बड़े स्तर पर सांप्रदायिक हिंसा देखी गई थी। उस वक्त सुरक्षा बलों को हालात पर काबू पाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। बदुरिया में हालात बेकाबू होने से राज्य सरकार को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बीजेपी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी। बीजेपी ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को संभालने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भेजे जाने की भी मांग की थी।

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