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अंतिम संस्‍कार के नहीं थे पैसे, दो दिन बहन की लाश के साथ मजबूर बैठा रहा बुजुर्ग डॉक्‍टर

बुजुर्ग डॉक्टर और उसकी बुजुर्ग बहन के पास खाने तक के पैसे नहीं थे और वे कई दिनों से केवल पानी पीकर गुजारा कर रहे थे।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पश्चिम बंगाल के उरुबेरिया में एक बुजुर्ग डॉक्टर पर आर्थिक तंगी की मार ऐसी पड़ी कि मृत बहन के अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं बचे। मजबूर डॉक्टर दो दिन तक बहन की लाश के साथ बैठा रहा। लाश जब घर में सड़ने लगी तो उसकी बदबू से मुहल्ला-पड़ोस के लोगों को जानकारी हुई और उन्होंने पुलिस को बुलाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सरकार मेडिकल कॉलेज से रिटायर 81 वर्षीय डॉक्टर निलमानी धरा नौकरी के दौरान हुए एक केस के कारण रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाओं और पेंशन से वंचित चल रहे थे। केस की पैरवी में उनके हालात बिगड़ते गए और उन्हें घोर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। पुलिस की मानें तो जब उनके घर से उनकी मृत बहन की लाश बरामद की गई तो वहां से ढेरों पानी की बोतलें भी मिली। माना जा रहा है कि बुजुर्ग डॉक्टर और उनकी बुजुर्ग बहन के पास खाने तक के पैसे नहीं थे और वे कई दिनों से केवल पानी पीकर गुजारा कर रहे थे।

साल्ट लेक में रहने वाली डॉक्टर की एक और बहन ने पुलिस को बताया कि उसके भाई और बहन की आर्थिक हालत बद से बदतर होती चली गई। उसकी बहन को सड़कों पर भीख तक मांगनी पड़ी थी।

डॉक्टर की 61 वर्षीय बहन करबी की 24 दिसंबर की रात करीब पौने दस बजे उलबेरिया के स्टेट जनरल अस्पताल में मौत हो गई थी। अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट सुदीप करार ने बताया कि करबी को 22 दिसंबर को बेसुध हालत में भर्ती कराया गया था। वह कुपोषण, बुखार और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित थीं। उनके भाई से कहा गया था कि वह अपनी बहन के शव को एंबुलेंस या शव वाहन से ले जाएं, लेकिन वाहन के लिए किराये के पैसे न होने के कारण वह शव को अस्पताल में ही छोड़ गए थे। 24 घंटे तक इंतजार करने के बाद मंगलवार की सुबह शव को उनके घर भिजवाया गया था।

मृत बहन का शव घर पहुंचने पर बुजुर्ग डॉक्टर ने एंबुलेंस के स्टाफ से उनकी बहन के लिए केक मंगवाया। पुलिस ने जब शव बरामद किया तो मुंह पर केक के टुकड़े भी चिपके हुए मिले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुजुर्ग डॉक्टर निलमानी धरा 1996 में रिटायर हो गए थे। पुलिस जब उनकी बहन का शव लेने घर पहुंची तो डॉक्टर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। डॉक्टर यह मानने को ही तैयार नहीं थे कि उनकी बहन दुनिया छोड़ चुकी थी। वह कहने लगे कि बहन का इलाज कर रहे हैं और उसे ठीक कर देंगे। डॉक्टर ने पुलिस वालों को भी खरी-खोटी सुनाईं।पुलिस की मानें तो जब डॉक्टर को यह आश्वासन दिया गया कि उनकी बहन को वापस लौटा दिया जाएगा तब जाकर उन्होंने घर से लाश ले जाने दिया।

हावड़ा पुलिस ने आश्वासन दिया कि बुजुर्ग डॉक्टर के इलाज और भोजन की व्यवस्था के लिए वह अदालत का रुख कर रही है, जब तक कोर्ट से फैसला नहीं आता, तब तक व्यवस्थाएं पुलिस करेगी।

डॉक्टर की तीसरी बहन सुरबी ने बताया कि एक जमाने में उसके भाई एक ब्रिलिएंट डॉक्टर हुआ करते थे। बांकुरा सम्मेलानी मेडीकल कॉलेज में वह एनाटोमी के प्रोफेसर हुआ करते थे। वहां से उनका ट्रांसफर एनआरएस मेडीकल कॉलेज में कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने उनका प्रमोशन नहीं किया था जिसकी वजह से उन्होंने केस ठोक दिया था। लेकिन उसके एक-दो साल बाद ही उन्हें रिटायर कर दिया गया और तब से लेकर आज तक केस चल रहा है। जिसमें उनका सब कुछ दांव पर लग गया।

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