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सर्वे: पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भाजपा को तगड़ा फायदा, ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी

पश्चिम बंगाल में पंचायती चुनाव की तिथियां अभी तक घोषित नहीं की गई हैं, लेकिन सर्वेक्षण में भाजपा के मुख्य विपक्षी दल के तौर पर सामने आने की संभावना जताई गई है। वाम मोर्चा और कांग्रेस का जनाधार और गिरने की बात कही गई है।

पश्चिम बंगाल पंंचायत चुनावों में भाजपा को जबरदस्त सफलता मिलने की बात कही गई है।

ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में भगवा रंग धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगा है। ताजा सर्वेक्षण के आंकड़ों से इसकी पुष्टि होती है। भाजपा को बंगाल के ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त फायदा मिलने का अनुमान जताया गया है। पंचायत चुनावों को लेकर ‘एबीपी आनंदा-सी वोटर’ द्वारा कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। पंचायत चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का ही परचम लहारने की बात कही गई है, लेकिन वर्षों से राज्य में राजनीतिक जमीन तलाश रही भाजपा को तगड़ा लाभ होने की बात कही जा रही है। ओपिनियन पोल के नतीजों की मानें तो भाजपा के दूसरी बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर सामने आने की उम्मीद है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के मुख्य विपक्षी पार्टी बनने के आसार हैं। वाम मोर्चा और कांग्रेस के क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर पर रहने की संभावना जताई गई है। पश्चिम बंगाल को किसी समय वामदलों का गढ़ माना जाता था, जिसे ममता बनर्जी ने ढहाया था। अब भाजपा धीरे-धीरे राज्य के अनेक हिस्सों में पूरी मजबूती से आगे बढ़ रही है। ऐसे में आनेवाले दिनों में बीजेपी ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा सकती है।

पंचायत चुनावों में तृणमूल को बड़ी जीत मिलने की उम्मीद: व्यापक हिंसा और गड़बड़ी की रिपोर्ट के बीच पूर्व घोषित चुनाव तिथि का रद्द कर दिया गया था। राज्य चुनाव आयोग ने अभी तक नई तिथि घोषित नहीं की है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रचंड जीत की बात कही जा रही है। नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान राज्य के कई हिस्सों में व्यापक हिंसा का मसला सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तक पहुंच गया था। भाजपा समेत अन्य दलों ने तृणमूल कांग्रेस पर पर्चा दाखिल न करने देने का आरोप लगाया था। सर्वेक्षण के अनुसार, चुनाव तिथि को लेकर विवाद का सबसे बड़ा फायदा भाजपा को होने जा रहा है। ओपिनियन पोल की मानें तो जिला परिषद की कुल 825 सीटों में से 538 तृणमूल और 167 के भाजपा के खाते में जाने की संभावना है। वहीं, वामदलों के हिस्से में जिला परिषद की महज 73 सीटें आ सकती हैं। कांग्रेस को सिर्फ 43 से ही संतोष करना पड़ेगा। इसके अलावा वोट शेयरिंग में भी भाजपा को जबरदस्त सफलता मिलने की संभावना जताई गई। तृणमूल का वोट शेयर 34 और भाजपा का 26 फीसद रह सकता है।

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