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मुकुल राय के सहयोगी भी तृणमूल में लौटे, सुभेंदु अधिकारी बोले- पश्चिम बंगाल में दलबदल क़ानून लागू करवाएगी बीजेपी

मुकुल राय के एक सहयोगी और उत्तर 24 परगना जिला परिषद के सदस्य रतन घोष ने रविवार को भगवा खेमा छोड़ दिया। उनके एक अन्य करीबी का कहना है कि उन्हें भाजपा में सम्मान नहीं मिल रहा है।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: June 14, 2021 8:31 AM
मुकुल रॉय के टीएमसी में शामिल होने के बाद अब उनके सहयोगी भी टीएमसी में लौट रहे हैं। (express file)

तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये कई नेता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद फिर से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। मुकुल रॉय के टीएमसी में शामिल होने के बाद अब उनके सहयोगी भी टीएमसी में लौट रहे हैं।

मुकुल राय के एक सहयोगी और उत्तर 24 परगना जिला परिषद के सदस्य रतन घोष ने रविवार को भगवा खेमा छोड़ दिया। उनके एक अन्य करीबी का कहना है कि उन्हें भाजपा में सम्मान नहीं मिल रहा है। कई भाजपा नेता जो पहले सत्ताधारी दल के साथ थे, ने रॉय के भगवा खेमे को छोड़ने के फैसले का स्वागत किया है। घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने पार्टी छोड़ दी है। बीजेपी की विचारधारा और काम करने का तरीका अलग है। मैं वहां नहीं रह सका। मैंने टीएमसी नेतृत्व से मुझे पार्टी में वापस लेने की अपील की है।”

टीएमसी के पूर्व विधायक और राज्य भाजपा के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के अध्यक्ष दुलाल बार ने रॉय के भाजपा छोड़ने के फैसले का समर्थन किया है। बार ने कहा “उन्होंने सही फैसला लिया है। वह भाजपा में नहीं रह सके क्योंकि उनका सम्मान नहीं किया गया था। अगर वह पार्टी में काम नहीं कर सकते तो उन्हे उसे छोड़ने का पूरा अधिकार है। मैं उनकी मदद से भाजपा में आया था। मुझे यहां भी सम्मान नहीं मिल रहा है। मैं आने वाले दिनों में अपना भविष्य तय करूंगा।”

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि पार्टी को बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं से तृणमूल कांग्रेस में लौटने के इच्छुक आवेदन मिले हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी की कोर कमेटी और ममता बनर्जी तय करेंगी कि इन नेताओं को वापस लिया जाए या नहीं। उन्होंने कहा “हमें बहुत सारे आवेदन मिल रहे हैं।”

वहीं मुकुल रॉय के भाजपा छोड़कर तृणमूल में वापसी पर नेता प्रतिपक्ष और उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी ने दल बदल कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य में इसे लागू करके रहेंगे।

नियमानुसार पार्टी बदलने से पहले विधायक को अपनी पुरानी पार्टी से इस्तीफा देना होता है और विधायकी का पद भी छोड़ना होता है। इसी का जिक्र करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आज तक पश्चिम बंगाल में दल बदल कानून लागू नहीं हुआ है लेकिन वह इसे लागू करवा कर रहेंगे।

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