पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के साथ ही सी.वी. आनंद बोस का कार्यकाल समाप्त हो गया। उनका कार्यकाल शुरू से ही विवादों और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ टकराव के कारण चर्चा में रहा। जब बोस ने नवंबर 2022 में राज्यपाल का पद संभाला था, तब शुरुआत में माहौल काफी सौहार्दपूर्ण दिखा। जनवरी 2023 में राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तीन बच्चों ने उन्हें पारंपरिक “हातेखोरी” रस्म के जरिए बंगाली भाषा की पहली शिक्षा दी।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में हुआ था। इस मौके पर ममता बनर्जी ने उन्हें 19वीं सदी के समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा लिखी प्रसिद्ध बंगाली पुस्तक ‘बर्णपरिचय’ भी भेंट की थी। उस समय बोस ने कहा था कि वे केंद्र और राज्य के बीच सहयोग का सेतु बनकर काम करेंगे। हालांकि यह शुरुआती दोस्ताना माहौल ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। उनके कार्यकाल में राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिला। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और सरकार के बीच विवाद का दौर जगदीप धनखड़ के कार्यकाल में देखा गया था।
सी.वी. आनंद बोस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई केरल में की थी। बाद में उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बीआईटीएस), पिलानी से पीएचडी की और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में फेलो भी रहे। उनके पिता वासुदेवन नायर स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के साथ आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। उन्हीं के नाम पर आनंद बोस का नाम रखा गया।
बोस 1977 बैच के आईएएस अधिकारी थे और केरल कैडर से थे। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार में शिक्षा, पर्यावरण, वन और श्रम जैसे विभागों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं।
राजनीति में एंट्री
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बोस औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें प्रवासी मजदूरों के कल्याण के लिए कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। नवंबर 2022 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। जून 2023 में बोस ने राज्य सरकार से बिना सलाह किए 11 राज्य विश्वविद्यालयों में अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति कर दी। इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस सरकार ने विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गतिरोध खत्म करने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित की अध्यक्षता में एक चयन समिति बनाकर समाधान निकाला।
पंचायत चुनाव और ‘पीस रूम’ विवाद
इसी साल पंचायत चुनाव से पहले बोस ने राजभवन में “पीस रूम” बनाया, जहां चुनाव हिंसा से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जाती थीं। उन्होंने खुद को “ग्राउंड जीरो गवर्नर” बताते हुए हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया। विपक्षी दलों ने इसे कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति का प्रमाण बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल पर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया।
चुनावी हिंसा के बाद बोस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि “सबसे अंधेरा समय सुबह से ठीक पहले होता है” और आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे। जुलाई 2023 में बोस ने नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति ओम प्रकाश मिश्रा के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए। दिलचस्प बात यह थी कि मिश्रा उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने कुलपति नियुक्ति के मुद्दे पर राज्यपाल के खिलाफ आंदोलन किया था। बाद में राज्य सरकार ने उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद में शामिल कर लिया।
विधानसभा के विधेयकों पर टकराव
अगस्त 2023 में तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने विधानसभा से पारित 19 विधेयकों को मंजूरी नहीं दी। हालांकि बाद में ममता बनर्जी से बातचीत के बाद बोस ने इनमें से कई विधेयकों को मंजूरी दे दी, लेकिन इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
राजभवन में उत्पीड़न का आरोप
मई 2024 में राजभवन की एक महिला कर्मचारी ने बोस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। बोस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी फायदे के लिए रची गई कहानी बताया। आरोप सामने आने के बाद राजभवन ने कोलकाता पुलिस के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिली कानूनी सुरक्षा के कारण उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकी। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता में विरोध मार्च भी निकाला। ममता बनर्जी ने उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।
इसके बाद जब ममता बनर्जी ने कहा कि महिलाएं राजभवन जाने में असुरक्षित महसूस करती हैं, तो बोस ने उनके खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया।
आर.जी. कर अस्पताल मामले पर विवाद
सितंबर 2024 में कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के बाद भी राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ गया। इस घटना पर बोस ने मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की और उन्हें “लेडी मैकबेथ” तक कह दिया।
तृणमूल सांसद के आरोप
नवंबर 2025 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि वे राजभवन में बीजेपी से जुड़े अपराधियों को शरण दे रहे हैं। इसके जवाब में बोस ने खुद राजभवन परिसर की लाइव प्रसारण के साथ तलाशी अभियान चलाया और उनके कार्यालय ने कल्याण बनर्जी के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई।
यह विवाद उस समय सामने आया जब चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद चल रहा था। राज्यपाल ने इस प्रक्रिया का समर्थन किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसका विरोध कर रही थी।
नवंबर 2025 में राज्यपाल के तौर पर तीन साल पूरे होने पर बोस ने कहा कि बंगाल में उनका अनुभव अच्छा रहा है और वे आने वाले समय में गांवों में ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है। गुरुवार को बोस ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ ही हफ्ते पहले आया है। सूत्रों के अनुसार आर.एन. रवि को उनकी जगह नया राज्यपाल बनाया जा सकता है। इस तरह लगभग तीन साल का उनका कार्यकाल लगातार राजनीतिक टकराव, विवादों और संवैधानिक बहसों के बीच समाप्त हुआ।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार रात को कई राज्यों में राज्यपालों की नियुक्तियां की हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से इस्तीफा देने वाले सीवी आनंद बोस के त्यागपत्र को भी स्वीकार कर लिया है। बोस की जगह आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
