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ममता को हराऊंगा या ले लूंगा सियासत से संन्यास- TMC चीफ के नंदीग्राम से लड़ने के फैसले पर BJP के शुभेंदु का ऐलान

BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि वह नंदीग्राम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC चीफ ममता बनर्जी को हराएंगा या फिर सियासत से संन्यास ले लेंगे। सोमवार (18 जनवरी, 2021) को अधिकारी का यह बयान दीदी के उस निर्णय के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह आगामी विधानसभा चुनाव […]

Author Edited By अभिषेक गुप्ता कोलकाता/नंदीग्राम | Updated: January 18, 2021 7:07 PM
West Bengal Elections, Bengal Elections, Mamata Banerjeeपश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था। पर हाल ही में वह बगावत कर BJP में शामिल हो गए। (फोटोः एक्स्प्रेस आर्काइव)

BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि वह नंदीग्राम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC चीफ ममता बनर्जी को हराएंगा या फिर सियासत से संन्यास ले लेंगे। सोमवार (18 जनवरी, 2021) को अधिकारी का यह बयान दीदी के उस निर्णय के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह आगामी विधानसभा चुनाव नंदीग्राम से लड़ेंगी। बनर्जी फिलहाल दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से विधायक हैं।

सोमवार को एक रोडशो के दौरान उनसे एक चैनल ने पूछा था- दीदी आपके गढ़ पहुंच गईं? शुभेंदु का जवाब आया, “दीदी का कोई गढ़ नहीं है। 2019 में बीजेपी ने हाफ कर दिया था। अब 2021 में साफ होने वाली हैं। दीदी का जो पोलिंग स्टेशन है…मित्रो इंस्टीट्यूशन, वहां भाजपा बढ़त बनाए है। 400 से अधिक वोटों की बढ़त है।”

अधिकारी के रोडशो के दौरान पथराव और हंगामा भी हुआ। उन्होंने इस पर कहा- मिनी पाकिस्तान और कोलकाता नगर निगम से जुड़े लोगों ने पत्थर फेंके। मैंने यह भी देखा कि हमारे लड़कों ने कैसे उन्हें खदेड़ा। मुझे मोदी जी की कही वह बात याद गई, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘घुस के मारा।’ बता दें कि पीएम ने यह बात गलवानी घाटी में हुई खूनी झड़प को लेकर शहीद हुए भारतीय जवानों के लिए कही थी।

पाला बदलकर भाजपा से हाथ मिला चुके अधिकारी ने बनर्जी पर आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र ने बनर्जी को सत्ता दिलाने में मदद पहुंचायी, उस क्षेत्र के लोगों को उन्होंने भुला दिया।

दरअसल, सीएम ने नंदीग्राम में आयोजित एक रैली में कहा कि दूसरे दलों में जाने वालों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं क्योंकि जब तृणमूल कांग्रेस बनी थी, तब उनमें से कोई साथ नहीं था। बकौल बनर्जी, ‘‘ मैंने हमेशा से नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत की है। यह मेरे लिए भाग्यशाली स्थान है। इस बार, मुझे लगा कि यहां से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। मैं प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी से इस सीट से मेरा नाम मंजूर करने का अनुरोध करती हूं।’’

सीएम के मुताबिक, ‘‘अगर संभव हुआ तो मैं भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से चुनाव लडूंगी। अगर मैं भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ पायी तो कोई और वहां से चुनाव लड़ेगा।’’ वह आगे बोलीं- जो पार्टी से चले गए, उन्हें मेरी शुभकामनाएं। उन्हें देश का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनने दीजिए। पर आप बंगाल को भाजपा के हाथों बेचने का दुस्साहस न करें। जब तक मैं जिंदा हूं, मैं उन्हें अपने राज्य को भाजपा के हाथों नहीं बिकने दूंगी।’’

अधिकारी, हाल ही में तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। कुछ हद तक माना जा रहा है कि बंगाल सीएम इसी वजह से अपनी लड़ाई राजनीतिक दिग्गज अधिकारी के गढ़ में ले पहुंची हैं।

नंदीग्राम विशेष आर्थिक क्षेत्र के निर्माण के लिए तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के ‘जबरन’ ‘जमीन अधिग्रहण के विरूद्ध विशाल जनांदोलन का केंद्र था। लंबे समय तक चले और रक्तरंजित रहे इस आंदोलन के चलते ही बनर्जी और उनकी पार्टी उभरी और 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में पहुंचीं। इसी के साथ 34 साल से जारी वाम शासन पर पूर्ण विराम लगा था।

बता दें कि भाजपा राज्य में एक दशक से राज कर रही तृणमूल को सत्ता से उखाड़ फेंकने की जी-तोड़ कोशिश में जुटी है। राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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