पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 में से 60 विधायक के बागी बनने के संकेत के बाद ममता बनर्जी की 8 जून को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले पार्टी की संसदीय इकाई में भी असंतोष पनप रहा है।
टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। दलबदल कानून से बचने के लिए बागी सांसदों को लोकसभा में कम से कम 20 और राज्यसभा में 9 सांसदों की आवश्यकता होगी।
लोकसभा में भी ऐसा होने की संभावना- टीएमसी सांसद
राज्यसभा सांसद और टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने शुक्रवार को कहा, “भले ही पार्टी राज्य में सुरक्षित हो लेकिन लोकसभा के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, मैंने इतने कम समय में करीब 60 विधायकों को इस्तीफा देते कभी नहीं देखा। मेरा कहना है कि लोकसभा में भी ऐसी ही प्रतिक्रिया होनी के संभावना है।”
20 सांसद भाजपा के संपर्क में
टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “संसदीय दल में दरार पड़ना अब बस समय की बात है। हमें पहले ही पता चला है कि करीब 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। यह संख्या और बढ़ेगी।”
इस पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हमारे एक वरिष्ठ नेता टीएमसी सांसदों के संपर्क में हैं।”
ममता खेमे को जगी उम्मीद
गुरुवार को ममता के खेमे के लिए उम्मीद तब जगी जब बागी 60 विधायकों में से आधे पार्टी बैठक में मौजूद रहे। सूत्रों ने दावा किया कि बैठक में नहीं आने वाले विधायक ममता को केवल मुख्य सलाहकार के पद तक सीमित किए जाने से सहमत नहीं थे। बल्कि उन्होंने मांग रखी कि ममता अध्यक्ष पद पर बनी रहें।
बागी नेताओं ने किया खंडन
हालांकि, बागी गुट के नेताओं ने किसी भी तरह की दरार की खबरों का खंडन करते हुए बताया कि यह बैठक सिर्फ कोलकाता और पड़ोसी जिलों के विधायकों के लिए थी।
ममता बनर्जी ने विधायकों से की बात
दरअसल, शुक्रवार को ममता बनर्जी और उनके खेमे के नेताओं ने विधायकों को फोन करके पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश की। बैठक में अभिषेक बनर्जी, कोलकाता के महापौर पद से इस्तीफा देने वाले फिरहाद हकीम और सांसद कल्याण बनर्जी जैसे नेता मौजूद रहे। हालांकि, टीएमसी के एक बयान के अनुसार, यह राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक थी जिसमें सभी सांसदों और विधायकों को नहीं बुलाया गया था।
टीएमसी सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। चार बार की लोकसभा सदस्य और ममता बनर्जी की लंबे समय से वफादार रहीं बारासात सांसद ने संसदीय दल की मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद पार्टी के नेतृत्व से निराशा व्यक्त करते हुए और पार्टी के आंतरिक कामकाज पर चिंता जताते हुए इस्तीफा दिया। कल्याण बनर्जी को संसदीय दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।
कल्याण बनर्जी ने भी पार्टी की एकता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ममता ने “अपने कार्यकाल के दौरान कई भ्रष्ट आचरणों को नजरअंदाज किया”, जिससे नेताओं के बीच असंतोष बढ़ गया है।
ममता ने विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बात करने के अलावा, अपने साथ मौजूद विधायकों को भी निर्देश दिया है कि वे बागी विधायकों से संपर्क करें, उनकी समस्याओं को सुनें और उन्हें समाधान का भरोसा दें, साथ ही यह वादा भी किया है कि वह खुद भी उनसे बात करेंगी।
ममता बनर्जी के नेतृत्व में रहना चाहते हैं- बागी खेमे के विधायक
गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए, बागी खेमे में शामिल टीएमसी के इटाहार विधायक मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि वह और अन्य लोग ममता बनर्जी के नेतृत्व में रहना चाहते हैं, अभिषेक बनर्जी के नहीं। मुशर्रफ हुसैन ने कहा, “हम सभी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के लिए (पार्टी लाइन के खिलाफ) प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। लेकिन यह भी सच है कि हम ममता को पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। हम पार्टी को तोड़ना नहीं चाहते।”
ममता बनर्जी के खेमे के बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने कहा, “मैंने ऐसे चार बागी विधायकों से बात की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने (पार्टी के विधानसभा नेतृत्व पर प्रस्ताव पर) दबाव में हस्ताक्षर किए, वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं।”
हमारी एकता बरकरार है- ऋतब्रता
हालांकि, ममता बनर्जी द्वारा “निष्कासित” किए गए मुख्य बागी नेताओं में गिने जाने वाले उलुबेरिया पुरबा के विधायक ऋतब्रता और एंटाली के विधायक संदीपान साहा ने कहा कि अब पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है। बागी विधायकों के समर्थन के बाद स्पीकर द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में स्वीकार किए गए ऋतब्रता ने कहा, “मैं कह सकता हूं कि हमारी एकता बरकरार है और विधानसभा में हमारी संख्या और बढ़ेगी।”
संदीपन साहा ने कहा, “विधानसभा अध्यक्ष ने हमें विपक्षी दल के रूप में स्वीकार कर लिया है।” ममता बनर्जी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हम तृणमूल कांग्रेस हैं और ममता बनर्जी हमारी नेता हैं। हमने सिर्फ इतना कहा है कि वह सलाहकार की भूमिका निभाती हैं। मुशर्रफ हुसैन विधायकों के एक वर्ग को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”
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तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह अब इस जिम्मेदारी को पहले की तरह समुचित ढंग से निभा नहीं पा रहे हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
