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दार्जिलिंग: शहीद बेटे का शव देख पिता बोला- ‘मैं खुश हूं, मेरा बेटा शहीद हुआ है’

जम्मू में राइफलमैन जीवन गुरूंग राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में एक आईईडी विस्फोट में शहीद हो गए थे। आज पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद की अंत्येष्टि की जाएगी।

जम्मू में शहीद हुए जवान जीवन गुरुंग का पार्थिव शरीर फोटो सोर्स- स्थानीय

जम्मू के नौशेरा सेक्टर में आइईडी ब्लास्ट में शहीद हुए दार्जिलिंग के जीवन गुरुंग का तिरंगा में लिपटा पार्थिव शरीर विमान से जैसे ही सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा एयर पोर्ट पर पहुंचा तो उस समय चारो तरफ सन्नाटा छा गया। अपने लाल की प्रतीक्षा में खड़ा पूरा परिवार शहीद का ताबूत देखते ही फफक पड़ा। लेकिन पिता किरण गुरुंग ने अपने चेहरे को भावशून्य रख पूरी जीवटता के साथ खुद को संभाले रखा।

उन्होंने कहा कि ‘मैं खुश हूं, मेरा बेटा शहीद हुआ है। वह केवल मेरा ही नहीं बल्कि पूरे देश का बेटा था। इससे बड़े गर्व की बात और क्या होगी कि मेरा बेटा सर्वोच्च बलिदान के साथ देश के काम आया। देश भर की तरह मुझे भी अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। आज पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद की अंत्येष्टि की जाएगी।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में आतंकियों द्वारा बिछाई गई आईईडी के ब्लास्ट की चपेट में आकर बीती 11 जनवरी को दार्जिलिंग के जीवन गुरुंग शहीद हो गए। वह मात्र 24 वर्ष के थे। जीवन साढ़े चार साल पहले ही भारतीय सेना में नियुक्त हुए थे। वह गोरखा रेजीमेंट के राइफलमैन के तौर पर जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। जीवन गुरुंग अपने मेजर महाराष्ट्र के पुणे निवासी एसजी नायर के साथ इस हमले में शहीद हुए। उनका पार्थिव शरीर बीते रविवार शाम विमान से बागडोगरा एयरपोर्ट लाया गया। वहीं कार्गो एरिया में पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद को सलामी दी गई।

सेना के जवानों द्वारा बजाई गई शहादत की धुन के बीच सेना के त्रिशक्ति कोर के बेंगडूबी मिलिट्री स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर अधीश यादव ने शहीद को सलामी दी। सेना के जवानों ने अपनी राइफलें उल्टी कर शहीद को सलामी सौंपी। इसी अवसर पर पश्चिम बंगाल राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव, दार्जिलिंग की जिलाधिकारी जयशी दासगुप्त व सिलीगुड़ी के एसडीओ सिराज दानेश्यार आदि ने भी शहीद को सलामी दी। उसके बाद शहीद का तिरंगा में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव दार्जिलिंग शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर लामाहट्टा ले जाया गया। वहीं आज सोमवार को दिन 11 बजे पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि कर उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

बता दें कि शहीद जीवन गुरुंग के पिता अरुणाचल प्रदेश में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा जीवन गुरुंग आगामी अप्रैल महीने में छुट्टी लेकर शादी करने के लिए दार्जिलिंग के लामाहट्टा अपने गांव आने वाला था। लेकिन वह दूल्हा बनने नहीं आ सके बल्कि शहीद बनकर आ गए। शहीद जीवन गुरुंग की बहन वेणु ने बताया कि जिस दिन वह शहीद हुए उसी दिन उनसे बात हुई थी। बकौल वेणु ‘हम फोन पर आपस में बात कर ही रहे थे कि अचानक भाई ने कहा कि रखो, रेजीमेंट से फोन आ रहा है। फिर, बाद में बात करता हूं। कुछ देर बाद जब भाई का फोन नहीं आया तो मैंने फोन किया लेकिन बात नहीं हो पाई। उसी रात लगभग 10 बजे सेना द्वारा सूचित किया गया कि भाई शहीद हो गए हैं।

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