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पार्षदों के बीजेपी में जाने पर ममता बोलीं- विधायक भी जाना चाहें तो जाएं, एक जाएगा तो 500 तैयार कर लूंगी

टीएमसी के पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चोरों की परवाह नहीं करती। विधायक चाहें तो वे भी जा सकते हैं।

Author कोलकाता | June 18, 2019 3:58 PM
पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो सोर्स – एनआई)

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे घोषित होने के बाद से पश्चिम बंगाल की राजनीति में घमासान मचा हुआ है। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई पार्षद व नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इस मसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मंगलवार (18 जून) को कहा कि टीएमसी कमजोर पार्टी नहीं है। अगर 15-20 पार्षद पैसे लेकर पार्टी छोड़ देते हैं तो मैं उनकी परवाह नहीं करती। मैं नहीं चाहती कि मेरी पार्टी में चोर रहें।

ममता बनर्जी ने कही यह बात: ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में कहा, ‘टीएमसी कमजोर पार्टी नहीं है। यदि 15-20 पार्षद पैसे लेकर पार्टी छोड़ देते हैं तो मैं इसकी परवाह नहीं करती। यदि पार्टी के विधायक भी बीजेपी में जाना चाहते हैं तो वे जा सकते हैं। हम नहीं चाहते कि हमारी पार्टी में चोर रहें। अगर एक व्‍यक्ति हमारी पार्टी छोड़कर जाएगा तो मैं 500 नए नेता तैयार कर लूंगी।’’

सोमवार को बीजेपी में शामिल हुए एक विधायक व 12 पार्षद: गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के नौपारा के टीएमसी विधायक सुनील सिंह और 12 पार्षद सोमवार (17 जून) को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे थे और भगवा पार्टी में शामिल हो गए थे। इस दौरान सुनील सिंह ने कहा था, ‘‘पश्चिम बंगाल की जनता सबका साथ सबका विकास चाहती है। दिल्ली में मोदीजी की सरकार है और हम चाहते हैं कि यही सरकार पश्चिम बंगाल में भी बने, जिससे हम पश्चिम बंगाल का विकास कर सकें।’’

टीएमसी के ये नेता भी बीजेपी में हो चुके शामिल: बता दें कि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद टीएमसी के कई नेता बीजेपी में शामिल हो गए थे। इनमें टीएमसी के विधायक मुनीरुल इस्लाम, पार्टी के वरिष्ठ नेता गदाधर हाजरा, मोहम्मद आसिफ इकबाल और निमई दास शामिल हैं। हालांकि, नेताओं के पार्टी बदलने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याएं भी हो रही हैं। चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से अब तक दोनों दलों के कई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।

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