बंगाल के नए भाजपा अध्यक्ष ने संभाली कमान, बोले- नहीं होने दूंगा राज्य का तालिबानीकरण

पश्चिम बंगाल इकाई के नए अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कई नेताओं के भाजपा छोड़ कर जाने को अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा कि जिन लोगों की अपनी पार्टी की विचारधारा और उसके उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता है वे कभी भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे।

मंगलवार को कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का सम्मान करते सांसद दिलीप घोष (फोटो: ट्विटर/ DilipGhoshBJP)

भारतीय जनता पार्टी  की पश्चिम बंगाल इकाई के नए अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को कमान संभाली। इस दौरान राज्य के पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा और कहा कि वे किसी भी हालत में राज्य का तालिबानीकरण नहीं होने देंगे और इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे।

बालुरघाट से लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार को दिलीप घोष की जगह पश्चिम बंगाल इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। सोमवार को कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय में सुकांत मजूमदार का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे लिए भाजपा कार्यकर्ता ही हमारी वास्तविक संपत्ति हैं। अगर हमने कोई गलती की है तो हम उसे सुधारेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग से  राज्य के तालिबानीकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

इस दौरान उन्होंने पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं के भाजपा छोड़ कर जाने को अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा कि जिन लोगों की अपनी पार्टी की विचारधारा और उसके उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता है, वे कभी भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारी माननीय मुख्यमंत्री अगली प्रधानमंत्री बनने की सोच रही हैं। लेकिन मैं उन्हें पूरे सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करते रहेंगे। राज्य की भाजपा इकाई प्रधानमंत्री मोदी को बंगाल से 2019 की अपेक्षा अधिक सीटें बतौर उपहार देगी।

इसके साथ ही उन्होंने चुनाव बाद हुई हिंसा के मामलों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा तथा राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बुद्धिजीवियों की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मैं इस राज्य के बुद्धिजीवियों से सवाल करना चाहता हूं कि वे विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद से भाजपा कार्यकर्ताओं पर किए गए अत्याचार पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। एक विशिष्ट समुदाय को हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला करने के लिए उकसाया गया। क्या यह स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है? मजूमदार ने दावा किया कि बुद्धिजीवी सभी चुप हैं, उन लोगों ने एक शब्द भी नहीं बोला है। लेकिन जब हमारे नेताओं तथागत रॉय और दिलीप घोष के भाषणों में त्रुटियां खोजने की बात आती है तो वे बहुत सक्रिय हो जाते हैं।(भाषा इनपुट्स के साथ)

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