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पाकिस्‍तानी जासूसों के लिए ‘सुरक्षित ठिकाना’ बना पश्‍चिम बंगाल, घुसपैठियों को बसने में कर रहे मदद

बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की समुचित निगरानी ना होने से एजेंटों को पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में घुसने में मदद मिली।

Author कोलकाता | January 2, 2016 18:17 pm
FILE (Express Photo)

पश्चिम बंगाल में 2015 में आईएसआई के साथ कथित संबंधों को लेकर एक मजदूर, कुछ पासपोर्ट एजेंट, एक कॉलेज छात्र और एक बारटेंडर सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही राज्य पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों के लिए एक ‘सुरक्षित ठिकाने’ के तौर पर सुरक्षा एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गया है। कोलकाता पुलिस अधिकारियों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कथित तौर पर आईएसआई द्वारा काम पर रखे गए एजेंटों से हासिल नकली पासपोर्ट, नकली मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड ने इन घुसपैठियों को देश में घुसने और यहां बसने में मदद की।

बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की समुचित निगरानी ना होने से एजेंटों को पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में घुसने में मदद मिली। एक वरिष्ठ सीआईडी अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘खगरागढ़ विस्फोट (बर्द्धमान में) की जांच के दौरान कई दस्तावेजों और सुरागों से संकेत मिले कि घटना में शामिल लोग बांग्लादेश की सीमा से आए थे और उन्हें स्थानीय लोगों की मदद मिली।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि जांच अब भी जारी है, लेकिन हमें संदेह है कि या तो वे स्थानीय एजेंट थे या एक दशक के भीतर यहां आकर बसे लोग।’’ अधिकारी ने बताया कि नवंबर में शहर के मध्य हिस्से में एक बारटेंडर की गिरफ्तारी से राज्य में काम कर रहे आईएसआई एजेंटों के एक नेटवर्क का खुलासा हुआ।

बांग्‍लादेशी संगठन भी सक्र‍िय
कोलकाता पुलिस के एक टॉप आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें सूचना मिली कि आईएसआई ने इन सभी एजेंटों को विशेष भूमिकाएं दी थीं। उनमें से कुछ यहां एजेंटों की भर्ती के लिए तो कुछ नौसेना, सेना या वायुसेना के शिविर वाले इलाकों से सूचना जुटाने के लिए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके अलावा ऐसे लोग भी हैं जो देश में जाली भारतीय नोट लाते हैं और अर्थव्यवस्था को तबाह करने के मकसद से उनका प्रसार करते हैं।’’ अधिकारी ने कहा कि जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश ने हावड़ा और दोनों उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में अपने नेटवर्क का विस्तार किया। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने मुर्शिदाबाद, नदिया, बर्द्धमान और बीरभूम जैसे जिलों में संगठन के शिविर स्थापित किए और हम पता लगा रहे है कि क्या उन्होंने असम, त्रिपुरा, मेघालय जैसे दूसरे राज्यों में भी अपना विस्तार किया है?’’

 

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