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अजूबा: 12 साल की लड़की कभी स्‍कूल नहीं गई, सीधे देगी बोर्ड की परीक्षा

बंगाल बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमोय गांगुली ने मीडिया को बताया, ''पिछले दो दशकों के इतिहास में उसका मामला अभूतपूर्व था। उसने टेस्ट में काफी अच्छा प्रदर्शन किया।'' बोर्ड के एक और अधिकारी ने मीडिया को बताया कि लड़की के पिता मोहम्मद ऐनुल ने 2019 की माध्यमिक परीक्षा में बच्ची को बैठाने के लिए बंगाल बोर्ड का रुख किया था।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली 12 वर्षीय सैफा खातून कभी भी स्कूल नहीं गईं लेकिन अब 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाली हैं। सैफा की पढ़ाई-लिखाई घर में ही हुई है। दिलचस्प बात यह भी है कि परीक्षा में बैठने की न्यूनतम उम्र 14 वर्ष रखी गई है लेकिन सैफा के मामले में उन्हें 12 वर्ष की उम्र में ही परीक्षा देने की अनुमति दी गई है। दरअसल, सैफा ने वेस्ट बेंगॉल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के द्वारा एक्सटर्नल कैंडिडेट्स का इलिजिबिलिटी टेस्ट पास किया था। इसमें ने सैफा 52 फीसदी अंक हासिल किए थे। इसी आधार पर सैफा को 2019 में होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है। बंगाल बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमोय गांगुली ने मीडिया को बताया, ”पिछले दो दशकों के इतिहास में उसका मामला अभूतपूर्व था। उसने टेस्ट में काफी अच्छा प्रदर्शन किया।” बोर्ड के एक और अधिकारी ने मीडिया को बताया कि लड़की के पिता मोहम्मद ऐनुल ने 2019 की माध्यमिक परीक्षा में बच्ची को बैठाने के लिए बंगाल बोर्ड का रुख किया था।

गांगुली ने बताया पिछली दफा निर्धारित उम्र से कम आयु वाले बाह्य उम्मीदवार ने 1991 में बोर्ड परीक्षा दी थी। बता दें कि पिछले वर्ष एक 11 वर्षीय हैदरबादी लड़के ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास की थी। अगस्त्य जैसवाल राज्य में ऐसे पहले परीक्षार्थी थे जिन्होंने इतनी कम उम्र में 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास की थी। उन्होंने 63 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। उस दौरान अगस्त्य ने मीडिया से कहा था कि वह अगले तीन वर्ष में कॉमर्स में ग्रेजुएशन करना चाहते हैं लेकिन अंतिम लक्ष्य डॉक्टर बनने का है। अगस्त्य ने बताया था कि बीकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद वह बायोलॉजी, फिजिक्स और केमेस्ट्री विषयों के साथ फिर से इंटरमीडिएट करेंगे और एमबीबीएस के लिए मेडीकल एंट्रेस एग्जाम देंगे।

अगस्त्य ने महज 8 वर्ष की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास कर ली थी। मेडीकल एंट्रेंस एग्जाम में बैठने के लिए 17 वर्ष की आयु निर्धारित है इसलिए अगस्त्य ने समय खाली जाने देने के बजाय बीकॉम करना ठीक समझा। अगस्त्य ने मीडिया को बताया था, ”मैं खाली नहीं बैठना चाहता हूं और बीकॉम करने के साथ आगे जाना चाहता हूं।” मजे की बात यह भी है कि 17 वर्ष की उम्र में अगस्त्य की बहन नैना पीएचडी करने लगी थीं।

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