पूरे बेंगलुरु में ऑटो रिक्शाओं की बुधवार से लंबी-लंबी कतारें एक आम बात हो गई है। ऐसा इस वजह से क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से ऑटो एलपीजी की भारी कमी हो गई है और शहर के ऑटो रिक्शाओं का बेड़ा ठप्प पड़ गया है। कर्नाटक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कहना है कि भंडार पर्याप्त है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
केंगेरी, इंदिरा नगर और राजाजी नगर जैसे इलाकों में, वाहन चालकों को पेट्रोल पंपों के पास अनिश्चित काल के लिए अपने वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं, क्योंकि टैंकर अभी तक नहीं पहुंचे हैं। पिछले दस सालों से ऑटो रिक्शा चालक चेतन, 12 किलोमीटर तक गैस की तलाश में भटकने के बाद केंगेरी सैटेलाइट टाउन के इंडियन ऑयल पंप पर फंस गए। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया , “मेरा पेट्रोल खत्म हो रहा था। मैं घर भी नहीं जा सकता। मेरे पास पेट्रोल की आपूर्ति फिर से शुरू होने तक इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
कालाबाजारी भी बढ़ रही
इस संकट ने एक कालाबाजारी को भी जन्म दिया है। जहां ओएमसी ने 1 मार्च को 54 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 1 अप्रैल को 89.52 रुपये प्रति लीटर कर दिया, वहीं चालकों का कहना है कि कुछ निजी स्टेशन इस हताशा का फायदा उठाते हुए 110-120 रुपये प्रति लीटर तक वसूल रहे हैं। नागेश भी एक ऑटो रिक्शा चालक हैं। उन्होंने कहा, “कुछ निजी पेट्रोल पंप 120 रुपये में फ्यूल बेच रहे हैं। मैंने इसकी पुष्टि एक साथी चालक से की है, लेकिन फिलहाल मेरे पास वहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं है क्योंकि वह 10 किलोमीटर दूर है।”
नागेश की बातें सुनकर 49 साल के कृष्णप्पा को अजीब तरह से खुशी हुई और उन्होंने और जानकारी मांगी। कृष्णप्पा ने कहा, “कृपया मुझे बताएं कि यह कहां उपलब्ध है। मुझे फ्यूल भरवाना है और घर जाना है, क्योंकि मैंने अपना ऑटो रिक्शा यहां दो दिनों के लिए खड़ा किया है।”
ऑटो रिक्शा चालक संघ के महासचिव रुद्र मूर्ति ने कहा कि गैस की कमी ने शहर के लगभग 60 प्रतिशत ऑटो रिक्शा को प्रभावित किया है, जिन्होंने डीजल की तुलना में बेहतर लाभ मार्जिन के लिए ऑटो एलपीजी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। मूर्ति ने कहा, “ड्राइवर बेबस हैं। वे पेट्रोल पंपों के पास अपनी गाड़ियों में सो रहे हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि अगली आपूर्ति कब होगी।” गुरुवार को, यूनियनों ने संभावित हड़तालों और शहरव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा करने के लिए बैठकें बुलाईं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने क्या कहा?
26 मार्च को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में कमी को गिरावट का कारण बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बाजार में कोई कमी नहीं है। बाजार को स्थिर करने के लिए, मंत्रालय ने पुष्टि की कि अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से 8 लाख मीट्रिक टन एलपीजी कार्गो आ रहा है, और इस कमी को पूरा करने के लिए आगे की खरीद पर बातचीत चल रही है।
नोएडा में गैस के लिए कतार में खड़े लोग
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। लोगों की शिकायतों के बावजूद सरकार ने बार-बार दावा किया है कि ऑनलाइन बुकिंग करने वालों को कुछ दिनों बाद उनके सिलेंडर मिल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर गैस उपभोक्ता बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक गैस सिलेंडर न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
