ताज़ा खबर
 

दो दिन में साढ़े 3 किलो घट गया अन्‍ना हजारे का वजन, तीसरे दिन जुटे गिनती के लोग

अन्ना के अनशन के पहले दिन यानी शुक्रवार को करीब 3000 लोग रामलीला मैदान पहुंचे थे। शनिवार को इनकी संख्या घटकर 2000 हो गई थी, तो वहीं रविवार को महज 1500 लोग ही रामलीला मैदान में उपस्थित थे।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (REUTERS फोटो)

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने के बाद से साढ़े तीन किलो वजन घट गया है। हालांकि उनके एक सहयोगी द्वारा जानकारी दी गई है कि उनका रक्तचाप सामान्य है। अन्ना के साथ करीब 227 लोग अनशन पर बैठे हैं, इनमें से तीन लोगों की थकावट और कमजोरी के रविवार को कारण सेहत खराब हो गई थी और वे लोग बेहोश हो गए थे। अन्ना ने शुक्रवार को रामलीला मैदान में अनशन शुरू किया। वह मोदी सरकार से लोकपाल की नियुक्ति, किसानों के लिए उचित फसल मूल्य व चुनाव सुधारों पर कार्ययोजना चाहते हैं।

अन्ना ने लोकपाल की मांग करते हुए सात साल पहले 2011 में भी अनिश्चितकालीन अनशन किया था, उस वक्त उन्हें बहुत से लोगों का समर्थन मिला था, लेकिन इस बार अन्ना को ज्यादा लोगों का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है। उनके अनशन के पहले दिन यानी शुक्रवार को करीब 3000 लोग रामलीला मैदान पहुंचे थे। शनिवार को इनकी संख्या घटकर 2000 हो गई थी, तो वहीं रविवार को महज 1500 लोग ही रामलीला मैदान में उपस्थित थे। 2011 में हुए अनशन के दौरान मैदान में कदम तक रखने की जगह नहीं होती थी।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक रविवार को अन्ना के अशनश में शामिल होने वाले सीतापुर (यूपी) के किसान भगवान पांडे ने बताया कि उसके गांव के बहुत से लोग दिल्ली आना चाहते थे, लेकिन फसल के मौसम की वजह से वह आ नहीं सके। पांडे ने कहा, ‘वह लोग बहुत परेशान हैं, लेकिन वे यहां नहीं आ सके, क्योंकि वह इस वक्त अपने खेत को छोड़ नहीं सकते हैं।’ इसके अलावा इस बार किरण बेदी, बाबा रामदेव और अरविंद केजरीवाल जैसे मुख्य चेहरे भी इसमें शामिल नहीं हुए हैं, यह भी कम लोगों के आने की मुख्य वजह बताई जा रही है। साथ ही इस बार इस आंदोलन को मीडिया के द्वारा भी ज्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही है।

इस आंदोलन के चीफ मीडिया कोर्डिनेटर और कोर कमिटी मेंबर जयंत मिश्रा का कहना है, ‘जिन लोगों ने सात साल पहले हुए आंदोलन को समर्थन दिया था, वह इस बार यहां मौजूद नहीं हैं और उनके समर्थक भी नहीं हैं। साथ ही बहुत की राजनीतिक पार्टियों का अपना अलग से किसान विंग है, ऐसे में लोग यह भी सोच रहे हैं कि जब उनकी पार्टी ही सत्ता में है तो उन्हें विरोध प्रदर्शन करने की कोई आवश्यकता नहीं है।’ साथ ही मिश्रा ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि बहुत से लोगों को गेट के अंदर नहीं घुसने दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों का पुलिस द्वारा खंडन कर दिया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App