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चंदा देने वालों के बारे में नहीं बताएगी आम आदमी पार्टी, आयोग ने मांगी तो ही देगी जानकारी

दिल्ली सरकार में मंत्री और दिल्ली आप के संयोजक गोपाल राय ने इस संबंध में एक अखबार से कहा, "लोकसभा चुनाव के लिए चंदा जुटाने के उद्देश्य से हम आने वाले दिनों में वीडियो मैसेज, पत्र लिखने और कुछ अन्य खास अभियान शुरू करेंगे।"

Author September 10, 2018 2:34 PM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा)

आम आदमी पार्टी (आप) ने लोगों से मिलने वाले चंदे को लेकर एक अहम फैसला लिया है। पार्टी ने ठाना है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के नाम पर उसे जितना भी चंदा मिलेगा, वह उसका ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करेगी। चंदा देने वालों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े, लिहाजा लोगों के बारे में भी नहीं बताया जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग (ईसी) इस बाबत पार्टी से अगर जानकारी मांगेगा, तो वह उसे चंदे का ब्यौरा देगी।

आप नेताओं ने इस बारे में कहा, “हमें मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ रहा है। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है।” बता दें कि पार्टी आगामी दिनों में चंदा जुटाने के लिए पहले की तरह कुछ अभियान शुरू करेगी। आप इससे पहले तक चंदा देने वालों का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर जारी करती थी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने इस संबंध में एक अखबार को बताया, “लोकसभा चुनाव के लिए चंदा जुटाने के उद्देश्य से हम आने वाले दिनों में वीडियो मैसेज, पत्र लिखने और कुछ अन्य खास अभियान शुरू करेंगे। फंड का अधिकतर हिस्सा चंदे से ही जुटाने का प्रयास किया जाएगा। हम इसके लिए वही तरीके अपनाएंगे, जो अभी तक अपना रहे थे।”

बकौल राय, “आयोग अगर हम लोगों से चंदा देने वालों के बारे में जानकारी मांगेगा, तो हम उसे वह मुहैया कराएंगे। मगर बाकी जगहों पर उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे दावा किया कि केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद आप की मदद करने वालों को कई तरह से परेशान किया गया।

मंत्री का कहना था, “हमें चंदा देने वालों के पीछे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इनकम टैक्स और रेवेन्यू इंटेलिजेंस सरीखी कई एजेंसियों को लगाकर उन्हें प्रताड़ित किया गया था। वे हमारी सहायता करना बंद कर दें, लिहाजा उनके साथ इस तरह का सलूक किया गया। हम नहीं चाहते हैं कि हमारे समर्थकों को चंदा देने के बाद इस तरह की कीमत चुकानी पड़े।”

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