दिल्ली सरकार ने हाल ही में दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ईवी पॉलिसी, 2026 लागू की है। इसके तहत 1 अप्रैल, 2028 से राजधानी में सिर्फ नए दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। दिल्ली सरकार के इस आदेश से वे लोग काफी परेशान हैं जो बीते कई सालों से दोपहिया पेट्रोल और डीजल वाहनों की मरम्मत कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।

ऐसे ही एक शख्स संजय कुमार हैं। संजय करोल बाग की एक दुकान में स्कूटर और मोटरसाइकिल रिपेयर करते हैं।

संजय कुमार को याद नहीं है कि उन्होंने अब तक कितने स्कूटर, मोटरसाइकिल को ठीक किया या उन्हें फिर से चालू किया हो। शायद यह संख्या हजारों में होगी। संजय बताते हैं कि वह बचपन से यह काम कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को लेकर फैसला राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लिया है लेकिन संजय जैसे हजारों लोगों के लिए यह जीने और मरने का सवाल है।

संजय कहते हैं, “ये (पेट्रोल बाइक) बंद हो जाएंगे, सारे इलेक्ट्रिक हो जाएंगे, धीरे-धीरे आ ही रही हैं बाजार में (ईवीएस)… जब ये (पेट्रोल) गाड़ियां आनी बंद हो जाएंगी, तो हम बिल्कुल बेकार हो जाएंगे।”

करोल बाग के इस बाजार में बाइक, स्कूटर के रिपेयर का काम करने वाले मैकेनिकों, मजदूरों के अलावा बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो दोपहिया वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और एक्सेसरीज का कारोबार करते हैं। इसके अलावा वाहनों के मोडिफिकेशन की वर्कशॉप और हेलमेट बेचने वाली दुकानों में भी सैकड़ों लोग काम करते हैं।

BS-6 या BS-4 को लेकर सवाल

मोटरसाइकिल के स्पेयर पार्ट्स बेचने वाली एक दुकान में डीलर अपने ग्राहक से पहला सवाल पूछता है- BS-6 या BS-4। करोल बाग की मार्केट में यह सवाल दिन भर में कई बार पूछा जाता है। आने वाले कुछ सालों में बाजार में एक बड़ी चुनौती सामने होगी या तो बाजार को खुद को बदलना होगा या फिर कारोबार के खत्म होने का खतरा होगा।

मौजूदा वक्त में जितने भी मैकेनिक इस बाजार में हैं, उन्हें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के काम की ज्यादा जानकारी नहीं है। बाजार में लोग इस बात को मानते हैं कि उन्हें नया काम सीखना होगा और वरना उनकी रोजी-रोटी बंद हो जाएगी और कारोबार नहीं बचेगा।

40 साल के बलकार पिछले कई सालों से पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की मरम्मत कर रहे हैं। बलकार ने इस साल की शुरुआत में एक कंपनी में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को असेंबल और रिपेयर करने का काम सीखा। जब कंपनी ने उन्हें निकाल दिया तो वह करोल बाग में आ गए, उन्हें इस बात का भरोसा है कि वह 6 महीने के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की मरम्मत का काम सीख लेंगे लेकिन बलकार जैसे लोग बहुत कम हैं।

दोपहिया वाहनों की मरम्मत करने वाले अभिषेक बताते हैं कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों में सिर्फ थोड़ा बहुत ही काम कर पाते हैं। तारिक नाम के शख्स का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन लंबे नहीं चलते, इलेक्ट्रिक वाहनों में जो मौजूदा लिथियम आयन बैटरियां हैं, वह 5 से 8 साल तक चलती हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन की तकनीक पर भरोसा नहीं

40 साल के डेनी कक्कड़ कहते हैं कि अब जब राजधानी में नई नीति लागू हो गई है तो हमें इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ही देखना होगा, हमारे पास अब कोई दूसरा रास्ता नहीं है। डेनी बताते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों में काफी कम पुर्जे होते हैं, जैसे- बैटरी, मोटर और इलेक्ट्रॉनिक के सामान।

वह कहते हैं कि इससे पुराने वाहनों की रिपेयर कर रहे मजदूरों के काम और कारोबार पर असर होगा। कक्कड़ को इलेक्ट्रिक वाहन की तकनीक पर भरोसा नहीं है। वह कहते हैं कि पेट्रोल इंजन बेहतर काम करता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन में बैटरी अगर ज्यादा गर्म हो जाए और इसका मैनेजमेंट ढंग से ना हो तो इसमें आग लग सकती है।

स्क्रैपिंग कारखाना चलाने वाले विजय ढींगरा बताते हैं कि उन्होंने 2016 में 66000 में स्कूटर खरीदा था, 10 साल से ज्यादा इस्तेमाल करने के बाद भी उन्हें इसके 30 से 35 हजार रुपए मिल जाएंगे लेकिन बाजार में कोई ऐसी इलेक्ट्रिक बाइक नहीं है जो इतने साल इस्तेमाल करने के बाद भी इतनी अच्छी रीसेल वैल्यू दे सके।

विजय कहते हैं कि अगर इलेक्ट्रिक वाहन को आप 200 किलोमीटर दूर ले जाएं और वह खराब हो जाए तो आप फंस जाएंगे, आपको उसे सर्विस सेंटर लाना होगा क्योंकि बाजार में बैठा कोई भी मैकेनिक उसे ठीक नहीं कर सकता।

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दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू हो गई है। नई पॉलिसी के जरिए सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि मार्च 2030 तक दिल्ली को अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल पर निर्भर किया जाए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।