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जल संरक्षण को चुनावी घोषणापत्र में शामिल करें राजनीतिक दल: सीचेवाल

संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा, 'प्रदेश के राजनीतिक दलों को आगामी विधानसभा चुनाव में जल एवं पर्यावरण को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ना चाहिए और इसलिए उन्हें इन दोनों विषयों को अपने अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए।’

Author जालंधर | May 23, 2016 1:14 AM
केंद्रीय मंत्री उमा भारती के साथ पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सीचेवाल। (फाइल फोटो)

पंजाब में जल संरक्षण को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की वकालत करते हुए जाने माने पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा है कि पंजाब की हवा और पानी को साफ एवं स्वच्छ रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों को पर्यावरण एवं जल संरक्षण जैसे मुद्दे को आसन्न विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए। सीचेवाल ने साक्षात्कार में कहा, ‘पंजाब में हवा और पानी दोनों खराब हो गए हैं। अत्यधिक खाद और यूरिया के इस्तेमाल से मिट्टी भी धीरे-धीरे खराब हो रही है और इसकी उर्वराशक्ति कम हो रही है। अब हमें आगामी पीढी को बचाने के लिए यहां के हवा और पानी को स्वच्छ रखने तथा जल को बचाने की दिशा में ठोस एवं कारगार उपाय करने की जरूरत है।’

पानी बचाने की अपील करते हुए संत ने कहा, ‘आगामी पीढ़ी को तथा पंजाब को बचाने के लिए पर्यावरण और जलसंरक्षण दोनो समय की जरूरत है। प्रदेश के राजनीतिक दलों को आगामी विधानसभा चुनाव में जल एवं पर्यावरण को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ना चाहिए और इसलिए उन्हें इन दोनों विषयों को अपने अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए।’ पर्यावरण के प्रति उदासीन रहने का आरोप राजनीतिक दलों पर लगाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी राजनीकि दल पर्यावरण एवं जल संरक्षण के प्रति निष्ठावान नहीं है जबकि सचाई यह भी है कि पंजाब में भूजलस्तर काफी नीचे चला गया है और गर्मी की शुरुआत में ही पानी की किल्लत शुरू हो गई है।

सीचेवाल ने यह भी दावा किया कि खराब पानी के कारण पंजाब का एक बड़ा हिस्सा कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित है इसलिए यह और भी आवश्यक हो गया है कि इस दिशा में ठोस और कारगर उपाय किया जाए ताकि लोगों को प्रभावित होने से बचाया जा सके। यह पूछने पर कि इस दिशा में कैसे काम किया जा सकता है, सीचेवाल ने कहा, ‘यह काम केवल सरकार नहीं कर सकती है। इसके लिए हम सबको जागरूक होना होगा। हम सब अपने आस-पास के तालाबों, नदियों और नालों की साफ सफाई खुद करें तो बहुत हद तक इससे निजात मिल सकती है।’

सीचेवाल ने कहा, ‘इसके लिए जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छता को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए और इस बारे में देश के भावी नागरिकों को विस्तार से बताया, समझाया, जगाया और पढ़ाया जाना चाहिए ताकि उन्हें जल, पर्यावरण एवं साफ-सफाई के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सके।’ पीढ़ी बचाने के लिए जल और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए सीचेवाल ने कहा, ‘साफ सफाई तथा पर्यावरण संरक्षण अब हमारे लिए समय की जरूरत हो गई है। अपनी आने वाली पीढी को बचाने के लिए हमें इस दिशा में जोर शोर से काम करना शुरू कर देना चाहिए।’

स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को समय की जरूरत बताते हुए सीचेवाल ने कहा, ‘हमें अपने आस-पास के नदियों, नालों, तालाबों को साफ सुथरा रखना चाहिए। समय-समय पर हमें स्वयं उसकी सफाई करनी चाहिए ताकि उसका जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सके।’

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