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Chennai में नहाने के लिए भी नहीं मिल रहा पानी, जूठे बर्तन टिश्यू पेपर से पोंछकर हो रहे इस्तेमाल

चेन्नई इस समय भयावह जलसंकट की समस्या से जूझ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी, उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम, कई मंत्रियों और अधिकारियों ने बुधवार को बैठक की।

Author चेन्नई | May 30, 2019 3:04 PM
जल संकट की समस्या से लोगों का हाल बेहाल फोटो सोर्स- फाइनेंशिल एक्सप्रेस

गली-मोहल्लों में पानी-टैंकरों के आने पर पानी भरने के लिए बर्तनों को लेकर दौड़ते लोग, कतार में अपनी बारी का इंतजार करती महिलाएं और घरों में सूखे पड़े नल, यह नजारा है देश के सबसे बड़े महानगरों में शामिल चेन्नई का। वर्तमान में चेन्नई भयावह जल संकट से जूझ रहा है। शहर के कई लोगों के लिए रोजाना नहाना मुश्किल हो गया है। कपड़े और बर्तन धोने के लिए पर्याप्त पानी मिलना एक सपना बन गया है।

टैंकरों पर खर्च करने पड़ रहे 2500 रुपएः मध्य चेन्नई के एक निवासी कुमार बी दास ने कहा कि वह बोतलबंद पेयजल खरीदने के लिए पैसा खर्च करने के अलावा प्रति माह पानी के टैंकरों पर लगभग 2,500 रुपये खर्च कर रहे हैं। एक आईटी पेशेवर ने कहा, ‘‘मैंने बर्तनों को इस्तेमाल के बाद कपड़े या टिश्यू पेपर से पोंछकर दोबारा इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इससे पानी की बहुत बचत होती है। बॉडी स्प्रे से काम चलाता हूं।’’ एक आवासीय एसोसिएशन के सदस्य रवींद्रनाथ ने कहा कि उन्हें जल आपूर्ति के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि सरकारी टैंकरों को दो से तीन हफ्ते लग जाते हैं।

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निजी आपूर्तिकर्ताओं ने बढ़ाए दामः लोगों ने दावा किया कि निजी आपूर्तिकर्ताओं ने दरों में बढ़ोतरी की है और प्रति ट्रक पानी के लिए 3,000 से 5,000 रुपये की मांग कर रहे हैं। साल 2017 के उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान कम बारिश होने और 2018 में भी मानसून की भारी कमी के कारण भूजल में कमी आई है और कई प्रमुख जल निकाय सूखने के करीब है। इसके चलते लोगों को अब जल-टैंकर के संचालकों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिसके सहारे वे अपना रोजमर्रा का काम चला रहे हैं। इस संकट के बीच, प्रदेश के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी, उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम, कई मंत्रियों और अधिकारियों ने बुधवार (29 मई) को जल आपूर्ति की समीक्षा करने के लिए एक बैठक की है।

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