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कचरे का पहाड़ बन गया जिंदगी पर बोझ

‘2017 में कचरे का खत्ता (लैंडफिल लाइट) गिर गया था, जिसकी वजह से 2 लोग मर गए थे, लेकिन आज भी सरकार ने इस खत्ते को हटाने के लिए कुछ नहीं किया है’।

Author नई दिल्ली | Published on: June 2, 2019 4:10 AM
कचरे का खत्ता

मीना

‘2017 में कचरे का खत्ता (लैंडफिल लाइट) गिर गया था, जिसकी वजह से 2 लोग मर गए थे, लेकिन आज भी सरकार ने इस खत्ते को हटाने के लिए कुछ नहीं किया है’। ये कहना है गाजीपुर के मोहल्ला कॉलोनी में रहने वाली बिस्मिल्ला खातून का। खातून बताती हैं कि हमारा घर तो बिल्कुल कचरे के सामने पड़ जाता है। जिस वजह से बदबू और गंदी हवा अंदर आती है। वे कहती हैं कि मेरी गली के कई घरों में लोगों को अस्थमा है। मेरी बहु को भी है। खातून की बहू नजमा बताती हैं कि 2 साल से सांस की परेशानी है। डॉक्टर कहते हैं कि साफ सुथरी हवा में रहो, लेकिन यहां खत्ते की वजह से सांस नहीं ले पाते। जानवरों की चर्बी के जलाने से बहुत बदबू आती है और गर्मी की वजह से कई बार कचरा खुद जल जाता है, जिससे गंदा बदबूदार धुंआ घरों में घुसता है। हम बस चाहते हैं कि यहां कूड़े का मसला हल हो जाए।

मुफ्त में देते हैं बिजली का बिल
अस्थमा से पीड़ित बुजुर्ग यासीन अंसारी ने हांफती हुई आवाज में कहा कि पिछले दस सालों में यहां अस्थमा की समस्या बढ़ी है। जहरीली हवा से अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है। यहां लोगों को इस कचरे की वजह से जान का खतरा रहता है। ये गरीब कॉलोनी है। इतनी आमदनी नहीं है कि अब दूसरा घर खरीद सकें। 1984 में गाजीपुर में कचरा डालना शुरू हुआ था। अब ये लैंडफिल साइट कचरे का पहाड़ बन गया है। दिल्ली में चार बड़े लैंडफिल में से ये एक है। 2017 की घटना के बाद उपराज्यपाल अनिल बैजल ने यहां कचरा डालना मना कर दिया था, लेकिन आज भी डाला जा रहा है। शाहिदा बेगम (50) का कहना है कि यहां पीने का पानी भी बहुत गंदा आता है। 20 रुपए की बोतल रोज खरीदना पड़ता है और मुफ्त में 700 रुपए पानी का बिल हर महीने भरते हैं। गुलफ्शा और शबनम का कहना है कि यहां बोरिंग के पानी से घर के बाकी काम करने पड़ते हैं। वो भीं गंदा और बदबूदार होता है, जिससे हमारी त्वचा खराब हो रही है। त्वचा पर दाने और खुजली हो रही है।

सरकार नहीं करती सहयोग
पूर्वी दिल्ली की मेयर अंजू कमलकांत कहती हैं कि हम इस कचरे को यहां से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। सोनिया विहार में कचरा डालने के लिए स्थान ढूंढ़ा है। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा। कचरे को दोबारा इस्तेमाल करने का भी प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र में पानी की समस्या पर मेयर का कहना है कि पूरी दिल्ली में पीने के पानी की समस्या है। इसके लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार है। वह हमें फंड नहीं देती है। मार्स फाउंडेशन के कार्यकर्ता रविंद्र झा कहते हैं कि हम गाजीपुर में 2011 से काम कर रहे हैं। यहां कचरे की वजह से प्रदूषण भी बड़ी समस्या है। महिलाएं और बच्चे कचरे से निकलने वाली टॉक्सिक गैसों से अधिक प्रभावित होते हैं। हम लोगों को शिविर लगाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करते हैं, लेकिन सरकार इस क्षेत्र की तरफ ध्यान नहीं देती और न ही कोई सहयोग करती है। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉक्टर योगेश कुशवाहा का कहना है कि गाजीपुर में ज्यादातर लोगों को दिक्कतें कचरे की वजह से है। वहां संक्रमण और पानी से होने वाली बीमारियां बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि भूमिगत पानी की वजह से टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियां यहां के लोगों को ज्यादा होती हैं। समस्याओं से बचने का एक ही इलाज है कि पानी फिल्टर करके पीएं। मास्क लगा कर रखें। अगर कोई कचरा जलाता है तो उसकी शिकायत करें।

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