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मंत्री के लेट होने से फीका पड़ा बिहार कृषि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह, छात्रों के चेहरे पर दिखी मायूसी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय का पांचवां दीक्षांत समारोह मंत्री के इंतजार में सुबह के बजाए शाम को आयोजित करने का ऐलान कुलपति को करना पड़ा।

Author भागलपुर | February 6, 2019 5:40 PM
बिहार कृषि विश्व विद्यालय के दीक्षांत समारोह की तस्वीर
बिहार कृषि विश्वविद्यालय का पांचवां दीक्षांत समारोह मंत्री के इंतजार में सुबह के बजाए शाम को आयोजित करने का ऐलान कुलपति को करना पड़ा। सुनते ही वहां मौजूद मेहमानों और पीली पगड़ी पहने डिग्री लेने वाले छात्रों के बीच मायूसी छा गई। दरअसल बुधवार को दिन के बारह बजे कुलाधिपति सह राज्यपाल लालजी टंडन को डिग्री बांटने आने का कर्यक्रम तय था। उनके साथ बिहार के  कृषि मंत्री प्रेम कुमार के भी आने का प्रोग्राम बना था। विश्वविद्यालय के प्रांगण में ही हेलीकाप्टर उतारने के वास्ते हेलीपेड बनाया गया था। भारी सुरक्षा इंतजाम किए गए। डिग्री लेने वाले कृषि  स्नातक व स्नातकोत्तर 162 छात्र और 76  छात्राएं पीली पगड़ी और तय लिवाश पहन सुबह दस बजे से ही सज धज कर इधर उधर घुमते दिखे।
दूसरे मेहमान भी पहुंच चुके थे। मगर हेलीकाप्टर में तकनीकी खराबी होने  की वजह से ऐन वक्त पर महामहिम लाट साहब का कार्यक्रम रद्द होने की घोषणा हुई। साथ ही कुलपति अजय कुमार सिंह ने बताया कि मंत्री जी पटना से सड़क रास्ते रवाना हो चुके हैं। इस वजह से अब कार्यक्रम शाम तक के लिए टाल दिया गया। उस वक्त घड़ी में पौने एक बजे थे।
जाहिर है पटना से सड़क के रास्ते सबौर पहुंचने में अमूमन छह घंटे लगते है। मसलन शाम छह बजे के बाद ही दीक्षांत समारोह हो पाएगा। मंत्री जी ने  शाम तक पहुंचने की बात कहकर कुलपति को दुविधा में डाल दिया। नतीजतन  दिन के हिसाब से की गई तैयारियां धरी की धरी रह गई। दूसरे विश्वविद्यालय के आए कुलपति व मेहमानों को  तो दिन का भोजन कराया गया।
मगर भोजन के दौरान कुलपति समेत आए मेहमानों के चेहरे पर मायूसी छाई थी। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति गंगा प्रसाद, वीपी मंडल मधेपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एके राय सरीखे तीन दर्जन से ज्यादा खास मेहमान पधारे थे। पर सब फीका हो गया। कुलाधिपति आने का कार्यक्रम  रद्द होने की सूचना मिलते ही वहां तैनात कारकेट के लिए खड़ी गाड़ियां, सुरक्षा में लगे अधिकारी , उनके स्वागत के लिए बुलाए गए बैंड बाजे बगैरह धीरे धीरे वहां से खिसक लिए। देखते ही देखते विश्वविद्यालय प्रांगण खाली सा हो गया। खास मेहमान भी चले गए। मसलन इंतजाम पर  किए गए लाखों रुपए का खर्च बेमजा हो गया।

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