गोवा की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। एक स्थानीय अखबार में पब्लिक नोटिस छपवाकर दावा किया गया है कि ‘गोवा कांग्रेस पार्टी’ के नाम से एक नई पार्टी बनने जा रही है। इसके लिए चुनाव आयोग को आवेदन भी दे दिया गया है। गोवा विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले इस पार्टी की एंट्री ने कई लोगों को हैरान कर दिया है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि वोटों के बंटवारे के लिए एक डमी पार्टी खड़ी करने की साजिश रची जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब पार्टी ने हाल ही में गिरीश चोडणकर को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। दरअसल, 29 मई को चोडणकर ने अमित पाटकर की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। पाटकर का आरोप है कि हाईकमान ने उनसे बिना चर्चा किए इतना बड़ा फैसला ले लिया। इसके बाद सोशल मीडिया विभाग के दो और सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया। वहीं, कई जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी देखने को मिली।
कई लोगों को चोडणकर की वापसी हैरान करने वाली लगी, क्योंकि 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। उस चुनाव में बीजेपी 20 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि कांग्रेस केवल 11 सीटें जीत सकी थी। इसके बाद कांग्रेस के आठ विधायकों ने पाला बदल लिया और पार्टी की संख्या घटकर सिर्फ तीन रह गई।
फिलहाल, गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इन दावों को खारिज किया है कि नई पार्टी से कांग्रेस के वोट बढ़ेंगे। कांग्रेस ने उल्टा बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह एक नए राजनीतिक दल को हवा दे रही है ताकि सेक्युलर वोटों का बंटवारा किया जा सके। गिरीश चोडणकर ने तो यहां तक आरोप लगाया कि बीजेपी 100 करोड़ रुपये की पार्टी बनवा रही है। उनके मुताबिक, यह सत्तारूढ़ दल की ‘डिवाइड एंड रूल’ रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनका कहना है कि जब भी बीजेपी को लगता है कि जनता उससे नाराज है, तब वह ऐसे राजनीतिक दलों को आगे बढ़ाती है, जिससे विपक्षी वोट बंट जाएं। उन्होंने कहा कि गोवा में महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे कई बड़े मुद्दे हैं। बीजेपी जानती है कि अगर वह सिर्फ अपने शासन के दम पर वोट मांगेगी, तो उसे हार का सामना करना पड़ सकता है। चोडणकर का दावा है कि गोवा के लोग राजनीतिक रूप से काफी जागरूक हैं और इस बार बीजेपी को दोबारा मौका नहीं देंगे।
वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर गोवा बीजेपी ने भी जवाब दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सिद्धेश नाइक ने दो टूक कहा कि गिरीश चोडणकर के पिछले कार्यकाल में ही कांग्रेस काफी कमजोर हो चुकी थी और बड़ी संख्या में नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। 4 जुलाई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है। अगर कोई 50 या 100 लोग मिलकर नई पार्टी बनाना चाहते हैं, तो उन्हें पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा, “आज ही किसी ने मुझे बताया कि भविष्य में ‘गोवा बीजेपी पार्टी’ के नाम से भी कोई दल बन सकता है। अगर कोई बनाना चाहता है, तो बना सकता है। हम इन बातों की चिंता नहीं करते।”
अगर गोवा कांग्रेस पार्टी की बात करें, तो इसके अध्यक्ष फ्रांसिस्को एंटोनियो जैसिंटो गोविया बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, फ्रांसिस्को मर्चेंट नेवी में मास्टर के पद पर कार्यरत हैं और अब तक किसी भी राजनीतिक दल से सीधे तौर पर जुड़े नहीं रहे हैं। उनका दक्षिण गोवा के वेलसाउ इलाके में एक घर है, जिसे फिलहाल पार्टी कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर गोवा कांग्रेस पार्टी के एक संस्थापक नेता ने बताया कि गिरीश चोडणकर को अचानक प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही नई पार्टी बनाने का फैसला लिया गया। उनका कहना था, “हमने अपनी जिंदगी कांग्रेस के लिए लगा दी। चुनाव हारने के बाद भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। लेकिन जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की, उन्हें ही किनारे कर दिया गया। अब पार्टी विचारधारा से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रही है कि कौन चुनाव जीत सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा प्रयास है कि गोवा की सत्ता किसी भी ऐसी पार्टी के हाथ में न जाए, जिसने जनता का भरोसा तोड़ा हो। कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में नहीं है, लेकिन लोगों की उम्मीदें आज भी उनसे नहीं हैं। गोवा के लोग एक ऐसे राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं जिसका हाईकमान दिल्ली में न हो। आम आदमी पार्टी, टीएमसी और रिवोल्यूशनरी गोवांस पार्टी (RGP) समेत कई दलों के नेता भी हमारे संपर्क में हैं।”
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी का नाम ‘गोवा कांग्रेस पार्टी’ ही क्यों रखा गया? इस पर संस्थापकों का कहना है कि इस पार्टी में शामिल होने वाले ज्यादातर लोग कभी ना कभी कांग्रेस में रहे। उनका कहना है कि ‘कांग्रेस’ का मूल अर्थ है समान विचारधारा वाले लोगों को एक मंच पर लाना। इसी सोच के साथ यह पार्टी गोवा के लोगों की आवाज उठाने का दावा कर रही है।
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