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दिव्यांग प्रोफेसर ने पास की सिविल सर्विस की परीक्षा, गलत इंजेक्शन ने छीन ली थी आंखों की रोशनी

महज डेढ़ साल की उम्र में आंखों की रोशनी गंवाने वाले सतेंद्र ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 714वां स्थान हासिल किया है। सतेंद्र कहते हैं कि इंसान को कभी भी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए।

दिव्यांग प्रोफेसर सतेंद्र ने पास की सिविल सर्विस की परीक्षा फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

डीयू के अरविंदो कॉलेज में पढ़ाने वाले 27 वर्षीय दिव्यांग प्रोफेसर सतेंद्र ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 714वां स्थान हासिल किया है। सतेंद्र बताते हैं कि जब वे डेढ़ साल के थे तो डॉक्टर के गलत इंजेक्शन लगा देने की वजह से उनकी आंखों की रोशनी चली गई, लेकिन उन्होंने अपनी इस कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाया। उन्होंने साबित कर दिखाया कि हौंसलों में दम हो तो परिस्थितियां भी आपके आगे सिर झुकाती हैं।

बचपन से देखते थे सिविल सर्विस में जाने का सपनाः सतेंद्र के परिवार ने बताया कि उनके एक परिचित ने सतेंद्र का राजकीय उच्चतर माध्यमिक बालअंध विद्यालय, किंग्स-वे कैंप में दाखिला कराया था। वहां से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सतेंद्र ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया।

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तीसरी बार में मिली सफलताः इसके बाद जेएनयू से एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। इस समय वे पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं। सतेंद्र ने बताया कि वे सिविल सर्विस में शामिल होने का सपना वह बचपन से देखते थे लेकिन उनका परिवार चाहता था कि पहले वह कुछ कमाने लग जाएं। उसके बाद वह सिविल सर्विस की परीक्षा दें। इसके बाद सतेंद्र ने साल 2015 में अरविंदो कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी की। सतेंद्र ने बताया कि साल 2016 और 2017 में उन्होंने सिविल सर्विसेस के पेपर दिए लेकिन सफल नहीं हो पाए। आखिरकार इस साल उन्हें कामयाबी हासिल हुई।

 

लक्ष्य पर रखें फोकसः सतेंद्र कहते हैं कि इंसान को कभी भी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उन्हें अपनी परेशानियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विस में जाने का उनका एक मकसद यह भी था कि वह लोगों के लिए एक उदाहरण पेश करना चाहते थे।

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