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शिक्षकों की कमी से उबरने में मददगार होगी वर्चुअल टीचिंग

प्रायोगिक परियोजना के तौर पर नेशनल नॉलेज नेटवर्क, सीडैक व देश के सात अन्य मेडिकल कॉलेजों के साथ मिलकर इस पर काम शुरू किया गया है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल )

चिकित्सा शिक्षा में शिक्षकों, बुनियादी संसाधनों व धन की भारी कमी से उबरने में वर्चुअल टीचिंग एक पूरक व मददगार विकल्प हो सकती है। एमबीबीएस, र्नसिंग व पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए एम्स के संकाय सदस्यों ने वर्चुअल टीचिंग की मदद से ई-लर्निंग पाठ्यक्रम तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। प्रायोगिक परियोजना के तौर पर नेशनल नॉलेज नेटवर्क, सीडैक व देश के सात अन्य मेडिकल कॉलेजों के साथ मिलकर इस पर काम शुरू किया गया है। यह जानकारी एम्स के पैथालॉजी विभाग के डॉ मनोज सिंह ने एक प्रेस वार्ता में दी। संस्थान में वर्चुअल टीचिंग पर हुए सम्मेलन में इसके तमाम पहलुओं पर दो दिन तक चर्चा हुई।

डॉ सिंह ने कहा कि आप किसी भी मेडिकल कॉलेज के छात्र हों, कहीं भी बैठे हों, आप को देश के सबसे उम्दा शिक्षक का लेक्चर सुनने को मिले और किए गए प्रशिक्षण को फि र से देखने को मिले तो यह आपके लिए सपने सरीखा अनुभव होगा। इससे आप की उस विषय पर समझ निश्चित तौर पर बेहतर होगी। सफलता की दर में भी सुधार होगा। इससे छात्र व शिक्षक दोनों की गुणवत्ता में सुधार होगा। डॉ सिंह ने कहा कि देश भर में चिकित्सा शिक्षा में शिक्षकों की भारी कमी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण केंद्रों की संख्या तो और भी कम है।

ऐसे में देश के उम्दा शिक्षकों के लेक्चर की वीडियो रिकार्डिंग करके उसे देश के सभी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को लिंक के जरिए या मोबाइल ऐप के जरिए मुहैया कराया जाए तो इसका फायदा ज्यादा से ज्यादा छात्रों व शिक्षकों को होगा। इससे देश के तमाम मेडिकल कालेजों, नर्सिंग कालेजों या पैरामेडिकल ट्रेनिंग सेंटरों के शिक्षण-प्रशिक्षण में भी सुधार होगा। डॉ सिंह ने कहा कि इस दिशा में देखें तो शरीर क्रिया विज्ञान और प्रयोगशाला संबंधी जानकारी व कौशल विकास पर कम काम हुआ है। मसलन, अगर किसी को नाड़ी, रक्तचाप या खून के नमूने लेने का सही तरीका नहीं पता हो तो उसकी रिपोर्ट भी गलत होगी। इस पर रिकॉर्डेड लेक्चर दिखाया जाए तो जहां कॉलेजों में बेहतर समझ वाले छात्र निकलेंगे, वहीं एएनएम व अन्य सामुदायिक काम में जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को भी उनके जैसे अन्य शिक्षकों के उस विषय पर किए गए कामों को जानने व समझने का मौका मिलेगा।

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