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बेटे को विरासत सौंपने के लिए वीरभद्र सिंह के सीट बदलने से दिलचस्प हुआ मुकाबला

जिला शिमला बेशक कांग्रेस पार्टी का गढ़ रहा हैं लेकिन इस बार ऐन मौके पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से अपने गृह जिला शिमला के बजाय जिला सोलन के अर्की विधानसभा हलके से चुनाव लड़ने के फैसले से इस जिले में दिलचस्प समीकरण बने हैं।

Author शिमला | November 1, 2017 09:21 am
वीरभद्र सिंह की फाइल फोटो।

ओमप्रकाश ठाकुर
वीरभद्र ने 2012 में शिमला ग्रामीण सीट 28892 मत लेकर जीती थी जबकि भाजपा के ईश्वर रोहाल को 8892 वोट मिले थे।  दिलचस्प यह है कि विक्रमादित्य के मुकाबले में भाजपा ने कभी वीरभद्र सिंह के वफादार रहे प्रमोद शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा हैं। प्रमोद शर्मा ने राजनीति में आने के लिए एचएएस की नौकरी छोड़ दी थी। वे अभी हिमाचल प्रदेश विवि में प्रोफेसर हैं व मुख्यमंत्री के पुत्र को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। 2003 व 2007 के विधानसभा चुनावों में वे कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेहद करीबी विद्या स्टोक्स के खिलाफ कुमारसैन हलके (अब ठियोग) से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़े व हार गए। राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि वे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के इशारे पर ही विद्या स्टोक्स के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरते थे।

जिला शिमला बेशक कांग्रेस पार्टी का गढ़ रहा हैं लेकिन इस बार ऐन मौके पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से अपने गृह जिला शिमला के बजाय जिला सोलन के अर्की विधानसभा हलके से चुनाव लड़ने के फैसले से इस जिले में दिलचस्प समीकरण बने हैं। वीरभद्र सिंह ने अपनी शिमला ग्रामीण सीट पुत्र व प्रदेश युवा कांगेस के अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह के लिए छोड़ दी। इस बार मुख्यमंत्री ने विद्या स्टोक्स को चुनाव न लड़ने के लिए इस बात पर मना लिया कि ठियोग से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं। 89 साल की विद्या स्टोक्स इसके लिए मान भी गईं। टिकट आवंटन से पहले वीरभद्र सिंह ठियोग से ही चुनाव लड़ना चाहते थे व इस बावत उन्होंने बैठकें भी कर लीं। लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने पैंतरा बदल दिया व जिला सोलन के अर्की हलके से चुनाव लड़ने का फैसला कर सभी को चौंका दिया। इस फैसले से कांग्रेस में टिकट के लिए खलबली मच गई और कांग्रेस पार्टी प्रचार से लेकर चुनाव प्रबंधन तक भाजपा व वामपंथियों से पिछड़ गई। अब मुकाबला भाजपा के राकेश वर्मा और राकेश सिंघा के बीच हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक सिंघा व स्टोक्स एक ही इलाके से हैं ऐसे में स्टोक्स के मैदान में न होने से उनके वोटों का एक बड़ा हिस्सा वामपंथी सिंघा की तरफ जा सकता है। कांग्रेस की इसी तरह की स्थिति शिमला में भी हैं। यहां पर कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के करीबी हरभजन सिंह भज्जी को टिकट दिया हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस के बागी व वीरभद्र सिंह के करीबी हरीश जनारथा ने बतौर निर्दलीय ताल ठोक दी हैं। हरीश जनारथा पिछली बार कांग्रेस के प्रत्याशी थे और 10935 वोट ले गए गए थे। भाजपा के सुरेश भारद्वाज 11563 मत लेकर जीत गए थे जबकि माकपा के टिकेंद्र पंवर को 8025 मत मिले थे। इस बार माकपा ने पूर्व मेयर संजय चौहान को टिकट दिया हैं। कांग्रेस के बागी के खड़े होने से इस सीट पर भी मुकाबला तिकोना हो गया हैं। दिलचस्प ये है कि भाजपा के सुरेश भारद्वाज, माकपा के संजय चौहान और कांग्रेस के बागी हरीश जनारथा अपर शिमला से हैं।

ऐसे में पहाड़ का वोट इन तीनों में ही बंटना हैं। चौपाल हलके से पिछली बार निर्दलीय बलबीर वर्मा ने 22056 मत लेकर कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष मंगलेट को हराया था। जीत के बाद बलबीर वर्मा विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के एसोसिएट सदस्य बन गए। जो निर्दलीय कांग्रेस के एसोसिएट सदस्य बने थे, उनके खिलाफ भाजपा ने सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका भी दायर की है। याचिका अभी लंबित हैं। मजेदार यह है कि बलबीर वर्मा एक अरसा पहले भाजपा में शामिल हो गए और इस बार चौपाल से भाजपा ने उन्हें टिकट भी दिया हैं। अब मुकाबला उनके व मंगलेट के बीच में हैं। चौपाल की तरह ही जुब्बल कोटखाई में भी कांग्रेस व भाजपा में कड़ा मुकाबला हैं। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल के पौत्र रोहित ठाकुर 29219 मत लेकर जीते थे जबकि भाजपा के नरेंद्र बरागटा को 20124 मत मिले थे।

रामपुर (आरक्षित) में इस बार कांग्रेस के बागी व पूर्व मंत्री सिंघी राम ने मुकाबला तिकोना किया हैं। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के पूर्व कमांडो नंदलाल ने ये सीट 27925 मत लेकर जीती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस के बागी के खड़े होने से यहां पर भी भाजपा व कांग्रेस में कड़ा मुकाबला हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का महल रामपुर में ही हैं व उनका यहां पर खूब दबदबा है। सीमाकंन से पहले रोहड़ू (आरक्षित) मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का हलका होता था। कांग्रेस के मोहन लाल ब्राक्टा यहां से रेकॉर्ड 34465 मत लेकर विजयी रहे थे। इस बार भाजपा ने यहां से महिला प्रत्याशी शशि बाला को उतारा हैं जो जिला परिषद का चुनाव जीत चुकी हैं।

कसुंप्टी हलके में भी इस बार दिलचस्प मुकाबला है। यहां पर कांग्रेस, भाजपा व माकपा ने राज परिवार से प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा ने यहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के भाई वीर विक्रमसेन की पत्नी विजय ज्योति सेन को उतारा हैं। ये जुन्गा रियासत से हैं। कांग्रेस ने कोटी रियासत के अनिरुद्ध सिंह को चुनाव मैदान में उतारा हैं। माकपा प्रत्याशी कुलदीप सिंह तनवर भी कोटी रियासत से हैं।

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