उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मील में छात्रों को पानीदार सब्जी परोसे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही बुधवार को रसोइए की सेवाएं भी समाप्त कर दीं गईं हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार देर शाम महमूदबाद पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई।
वीडियो में कथित तौर पर बच्चों की थालियों में परोसी गई पतली पानीदार करी में आलू के टुकड़े तैरते हुए दिखाई दिए। बच्चों को बांटी गई रोटियां ज़मीन पर गिर गईं जिसके बाद एक बच्चे ने एक रोटी उठाकर वापस अपनी थाली में रख ली। कांग्रेस ने भी इस वीडियो को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा, “क्या बीजेपी नेता अपने बच्चों को ऐसी सब्जी खिलाएंगे?”
BEO और BDO को प्रारंभिक जांच करने के लिए कहा गया
वीडियो वायरल होने के बाद महमूदबाद के बीईओ और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर को प्रारंभिक जांच करने के लिए कहा गया। सीतापुर के जिला मजिस्ट्रेट डॉ राजगणपति आर और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) गोरखनाथ पटेल ने एक बयान में कहा कि ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों के तत्काल पर्यवेक्षक अधिकारी (BEO) उदयमणि पटेल को भी कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया गया है। उनके सेवा रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है।
मिड डे मील में घटिया खाना परोसने का आरोप
ऑफिसर ने महमूदबाद ब्लॉक के छंगापुर गांव के एक प्राथमिक विद्यालय में वीडियो का पता लगाया। उन्होंने विद्यालय का दौरा किया और वीडियो की पुष्टि के लिए छात्रों और ग्रामीणों से बात की। वीडियो असली पाया गया जिसके बाद जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय और बीएसए को एक रिपोर्ट सौंपी गई। जिला मजिस्ट्रेट ने प्रधानाध्यापिका कल्पना वर्मा और रसोइया अनीता को मिड डे मील में निर्धारित मानदंडों के अनुसार भोजन और दूध न परोसने और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध होने के बावजूद घटिया क्वालिटी का खाना तैयार करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
बीएसए ने एक आदेश में प्रिंसिपल वर्मा को तत्काल निलंबित करने और अनीता की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया। अनीता संविदा आधार पर कार्यरत थीं।
महमूदबाद पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीईओ की शिकायत पर प्रधानाध्यापिका और रसोइए के खिलाफ सरकार द्वारा आपूर्ति की गई खाद्य सामग्री के गबन और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के खुलने के 13 दिनों के भीतर ही 63 किलोमीटर लंबे मार्ग पर गंभीर कमियां सामने आने के बाद , भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने समस्याओं के पूरी तरह से ठीक होने तक टोल वसूली बंद कर दी है। प्राधिकरण ने ठेकेदार, सलाहकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
