गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग में वीआइपी वाहन नंबरों की नीलामी इन दिनों राजस्व बढ़ाने के बजाय विवादों में घिरती नजर आ रही है। ताजा मामला ‘एफके’ सीरीज के सबसे खास नंबर 0001 से जुड़ा है। इस नंबर के लिए आनलाइन नीलामी के दौरान प्रदेश की अब तक की सबसे ऊंची बोली 49 लाख रुपए लगी थी, जिससे विभाग को भारी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन भुगतान के समय यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।

जानकारी के अनुसार, सबसे ऊंची बोली लगाने वाले ने तय समय में रकम जमा नहीं की। इसके बाद नियमों के अनुसार यह नंबर दूसरी सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को दिया जाना था, लेकिन उसने भी नंबर लेने से इनकार कर दिया। इसी तरह कई बोलीदाता पीछे हटते चले गए और अंतत: यह वीआइपी नंबर सातवें बोलीदाता को मात्र 2.22 लाख रुपए में आबंटित कर दिया गया। यह नंबर एक रेंज रोवर कार के मालिक ने खरीदा है। इसी तरह ‘जेम्स बान्ड’ के नाम से मशहूर 0007 नंबर के साथ भी यही स्थिति सामने आई। इस नंबर पर नीलामी के दौरान 22 लाख रुपए तक की बोली लगी थी, लेकिन अंत में यह नंबर केवल 2.44 लाख रुपए में बेच दिया गया।

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इन मामलों ने नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यह फर्जी बोली का एक संगठित खेल हो सकता है, जिसमें जानबूझकर ऊंची बोली लगाकर वास्तविक खरीदारों को पीछे हटने पर मजबूर किया जाता है। बाद में बोली लगाने वाले रकम जमा नहीं करते और नंबर बेहद कम कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति को मिल जाता है।

इस प्रक्रिया से न केवल परिवहन विभाग को लाखों-करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि ईमानदार वाहन मालिकों के साथ भी अन्याय हो रहा है। एआरटीओ नंद कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था में सुधार के लिए शासन को पत्र लिखा गया है और जल्द ही ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।