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AC खराब होने पर यात्रियों ने जताया विरोध, स्टेशन मास्टर ने RPF से कहा-गिरफ्तार कर लो

स्टेशन मास्टर ट्रेन पर सवार तो हुए मगर उन्होंने सुल्तानगंज स्टेशन आरपीएफ को उन्हें बंधक बनाने का संदेश दे दिया। जिस पर ट्रेन के सुलतांगज पहुंचते ही आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौके पर पहुंच गए।

एसी खराब होने के बावजूद विक्रमशिला ट्रेन रवाना किए जाने पर स्टेशन पर परेशान यात्री।

रविवार को भागलपुर रेलवे स्टेशन से चली 12367 भागलपुर-आनंदविहार विक्रमशिला ट्रेन को एसी खराब रहने के बावजूद रवाना कर दिया गया। जिस पर यात्रियों ने विरोध किया तो स्टेशन प्रबंधक ओंकार प्रसाद ने विरोध करने वाले यात्री अभिषेक को आरपीएफ के हवाले करने की कोशिश की। स्टेशन प्रबंधक ने यात्री पर आरोप लगाया कि यात्री उन्हें बंधक बनाकर दिल्ली ले जा रहे थे। हालांकि स्टेशन मास्टर अपने आरोपों की पुष्टि नहीं कर पाए। वहीं इस पूरे हंगामे के चलते ट्रेन भागलपुर से 44 मिनट देरी से खुली। वहीं एसी बोगियों में सफर कर रहे यात्रियों ने मालदा रेल प्रबंधक को एक आवेदन पत्र देकर स्टेशन प्रबंधक और आरपीएफ की बदसलूकी के खिलाफ कारवाई करने की अपील की है।

बता दें कि यात्रियों ने ट्रेन की एसी2 बोगी का एसी खराब होने पर मालदा डीआरएम से लेकर रेलमंत्री पीयूष गोयल तक को खूब ट्वीट किए, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद यात्रियों ने रेल अधिकारियों व स्टेशन प्रबंधक को अपनी परेशानी से अवगत कराया और एसी ठीक कराने की मांग की। उल्लेखनीय है कि भागलपुर की राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन भी इसी ट्रेन में सफर कर रहीं थी। जिसकी जानकारी होने पर परेशान यात्रियों ने सांसद को पूरी घटना की जानकारी दी। जिस पर सांसद कहकशां परवीन ने यात्रियों को तमाम वाकए का जिक्र हस्ताक्षर सहित लिखित में देने को कहा और यात्रियों को कारवाई का भरोसा दिलाया। वहीं दूसरी तरफ स्टेशन प्रबंधक चाहते थे कि ट्रेन को किसी तरह रवाना कर दिया जाए। उन्होंने यात्रियों को भरोसे में लेने के लिए यह कहा कि वे सुल्तानगंज तक साथ चलते है। वहां ट्रेन खड़ी कर एसी ठीक करा दिया जाएगा। बोगी के परिचायक (एटेंडेंट) व दूसरे रेलवे कर्मचारी दिखावे के लिए हाथ पैर मारते रहे और ट्रेन रवाना कर दी गई।

bihar भागलपुर स्टेशन प्रबंधक

इस बीच स्टेशन मास्टर ट्रेन पर सवार तो हुए मगर उन्होंने सुल्तानगंज स्टेशन आरपीएफ को उन्हें बंधक बनाने का संदेश दे दिया। जिस पर ट्रेन के सुलतांगज पहुंचते ही आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौके पर पहुंच गए। आगे बढ़कर विरोध करने वाले मुसाफिर अभिषेक की ओर इशारा कर स्टेशन प्रबंधक ने उसे गिरफ्तार करने को कहा। यह देख दूसरे मुसाफिरों ने इसका विरोध किया। तो आरपीएफ वालों ने उनका पीएनआर नंबर और नाम ठिकाना पता लिख छोड़ तो दिया। पर अभिषेक के साथ सफर कर रही उनकी पत्नी कंचन और बच्चें बुरी तरह डर गए। और उन्होंने सभी मुसाफिरों से मदद की गुहार लगाई। उन्हें दहशत इस बात की है कि झूठे मुकदमे में पुलिस फंसा न दे। मुसाफिरों की शिकायत है कि यार्ड से ट्रेन के कोच बगैर जांचे परखे बिना कैसे स्टेशन पर भेज दिए गए? और फिर स्टेशन के अधिकारियों ने लापरवाही और बदतमीजी की सारी हदें पार कर दी। रेलवे किराया वसूलने में तो कोताही नहीं करती। तो सुविधा देने में क्यों?

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