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विकास दुबेः जमीन जायदाद के धंधे से लेकर राजनीति तक

कानपुर परिक्षेत्र के एडीजी जेएन. सिंह ने बताया, ‘मुठभेड़ में दुबे घायल हो गया जिसके बाद उसे हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।’

अधिकारियों के मुताबिक, साल 2000 में दुबे ने जेल में रहते हुए खुद भी जिला पंचायत चुनाव में शिवराजपुर सीट से जीत हासिल की थी।

बुरे काम का बुरा ही अंजाम होता है। विकास दुबे का अंत इस बात को साबित करता है। कुख्यात अपराधी और कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले के मुख्य आरोपी दुबे ने हर जगह तिकड़मबाजी ही की। जमीन जायदाद के धंधे से लेकर राजनीति में भी हाथ आजमाए। उसे इसमें कामयाबी भी मिली। उसे राजनीतिक संरक्षण हासिल था। इसी आधार पर वह पुलिस अधिकारियों पर धौंस भी जमाता था। जिला स्तर का एक चुनाव भी उसने जीता। वह राजनीतिक हस्तियों के साथ भी नजर आता था। अपने क्षेत्र में दबदबा बनाने वाला दुबे पिछले शुक्रवार को उस वक्त सुर्खियों में आया जब उसके खिलाफ कार्रवाई करने गए आठ पुलिसकर्मियों पर गोलियों की बौछार करते हुए उन्हें मौत के घाट उतारने की सनसनीखेज घटना हुई।

इस घटना के कुछ ही घंटों बाद विकास दुबे की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी, जिसमें वह एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री के साथ दिखाई दे रहा था। कांग्रेस ने दावा किया था कि यह दिखाता है कि उसे किस कदर राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इसके अलावा, एक अन्य तस्वीर में दुबे जिला पंचायत के चुनाव में अपनी पत्नी ऋ चा दुबे के लिए वोट मांगते हुए दिखाई दे रहा था। वह यह चुनाव घिमाऊ से जीती थीं और बिकरू गांव इसी जिला पंचायत के अंतर्गत आता है। इस पोस्टर में दो नेताओं की भी तस्वीरें हैं जो दिखाती है कि कुख्यात अपराधी की पत्नी को भी नेताओं का समर्थन था।

अधिकारियों के मुताबिक, साल 2000 में दुबे ने जेल में रहते हुए खुद भी जिला पंचायत चुनाव में शिवराजपुर सीट से जीत हासिल की थी। उस दौरान वह हत्या के मामले में जेल में बंद था। दुबे की गिरफ्तारी के बाद उसकी मां सरला देवी ने कहा था, ‘इस वक्त वह भाजपा में नहीं है, वह सपा में है।’ इस पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि दुबे, ‘पार्टी का सदस्य नहीं है’ और उसके टालने के लिए वाहन को अचानक मोड़ा जिससे वह अनियंत्रित होकर पलट गया। हालांकि इस घटना में पुलिस और एसटीएफ के कुल छह जवानों के घायल होने की सूचना है।

अपर पुलिस महानिदेशक (कानूनव्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया, ‘मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मियों के शहीद होने के मामले में मुख्य आरोपी विकास दुबे को उज्जैन पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उप्र पुलिस और एसटीएफ की टीम शुक्रवार सुबह उसे कानपुर नगर लेकर आ रही थी। कानपुर नगर भौती के पास प्रात: करीब साढ़े छह बजे पुलिस का यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया, जिससे उसमें बैठे अभियुक्त और पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस दौरान अभियुक्त विकास दुबे ने घायल पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस टीम द्वारा पीछा कर उसे घेर कर आत्मसर्मपण करने के लिए कहा गया, लेकिन जान से मारने की नियत से वह पुलिस टीम पर गोलीबारी करने लगा। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ जवाबी गोलीबारी की गई। इसमें विकास दुबे घायल हो गया, जिसे तत्काल ही अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस पूरे प्रकरण में पुलिस के चार लोग घायल हैं जिसमें तीन सब इंस्पेक्टर व एक कांस्टेबल हैं और एसटीएफ के दो कमांडो को भी गंभीर चोटें आई हैं।’

उन्होंने बताया कि बिकरू पुलिस मुठभेड़ में कुल 21 अभियुक्त नामजद हैं जिसमें से तीन लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, छह अभियुक्त मारे जा चुके हैं और अब भी 12 इनामी बदमाश वांछित हैं। कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने बताया कि सड़क दुर्घटना सुबह हई। उन्होंने कहा ‘तेज बारिश हो रही थी। पुलिस ने गाड़ी तेज भगाने की कोशिश की जिससे वह डिवाइडर से टकराकर पलट गई और उसमें बैठे पुलिसकर्मी घायल हो गए। उसी मौके का फायदा उठाकर दुबे ने पुलिस के एक जवान की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की और कुछ दूर भाग भी गया।’ कुमार ने कहा, ‘तभी पीछे से एस्कार्ट कर रहे एसटीएफ के जवानों ने उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की और उसी दौरान उसने एसटीएफ पर गोली चला दी जिसके जवाब में जवानों ने भी गोली चलाई और वह घायल होकर गिर पड़ा। हमारे जवान उसे अस्पताल लेकर गए जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।’

कानपुर परिक्षेत्र के एडीजी जेएन. सिंह ने बताया, ‘मुठभेड़ में दुबे घायल हो गया जिसके बाद उसे हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।’ इस बीच गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) के कार्यवाहक प्राचार्य डा आरबी कमल ने बताया कि दुबे को अस्पताल में पूरी तरह से मृत अवस्था में लाया गया था। उन्होंने कहा कि दुबे के शरीर पर चार घाव दिखे, जिनमें से तीन सीने पर और एक हाथ में थे। हालांकि, इसके बारे में बाकी जानकारी पोस्टमार्टम होने के बाद पता चलेगी। हैलट अस्पताल जीएसवीएम का हिस्सा है। कमल ने बताया कि दुबे का कोरोना जांच भी करवाया गया और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि इसके बाद दुबे का शव पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंप दिया गया।

पत्नी को भी मिला संरक्षण

कुख्यात अपराधी की पत्नी को भी नेताओं का समर्थन था।अधिकारियों के मुताबिक,साल 2000 में दुबे ने जेल में रहते हुए खुद भी जिला पंचायत चुनाव में शिवराजपुर सीट से जीत हासिल की थी।उस दौरान वह हत्या के मामले में जेल में बंद था। वायरल एक तस्वीर में दुबे जिला पंचायत के चुनाव में अपनी पत्नी ऋचा दुबे के लिए वोट मांगते हुए दिखाई दे रहा था। वह यह चुनाव घिमाऊ से जीती थीं और बिकरू गांव इसी जिला पंचायत के अंतर्गत आता है।

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