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”भ्रष्टाचार छुपाने के लिए शुरू हुई सम-विषम योजना”

हड़बड़ी में शुरू की गई दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि यह योजना सरकार ने अपने भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने के लिए शुरू की थी।

Author नई दिल्ली | January 3, 2016 2:02 AM

हड़बड़ी में शुरू की गई दिल्ली सरकार की सम-विषम योजना पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि यह योजना सरकार ने अपने भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालने के लिए शुरू की थी। इसका मकसद दिल्ली की जनता नववर्ष के प्रारंम्भिक 15 दिनों में इस योजना में उलझकर सरकार के मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ नौकरशाहों के भ्रष्टाचार की चर्चा न कर वाहनों पर पाबंदी लगाने की चर्चा में उलझ जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस तानाशाही से दिल्ली के स्कूलों को सम-विषम योजना के नाम पर बंद किया, उससे 40 लाख छात्र-छात्राएं, अभिभावक और स्कूलों के कर्मचारी घर में बंद हो गए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक जनवरी को योजना शुरू होने के दो घंटे बाद ही मुख्यमंत्री ने योजना सफल होने का दावा कर अपनी पीठ थपथपा ली।

उन्होंने बताया कि आइआइटी कानपुर के प्रदूषण विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों का योगदान औसतन 10 फीसद है। प्रदूषण के लिए सड़क और निर्माण कार्यों की धूल का योगदान 40 फीसद से अधिक है। जो 10 फीसद वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं, उनमें 50 फीसद हिस्सा ट्रकों का है। ट्रकों के बाद सबसे ज्यादा प्रदूषण दोपहिया वाहन फैलाते हैं। चार पहिया वाहन वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ 10 फीसद जिम्मेदार हैं।

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विशेषज्ञों के मुताबिक 10 माइक्रॉन से कम आकार वाले या पीएम-10 के निलंबित पदार्थों की दो तिहाई संख्या धूल के कारण है। पीएम 2.5 का करीब 40 फीसद प्रदूषण सड़क की धूल के कारण है। पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर के लिए वाहनों का योगदान औसतन 10 फीसद ही है। वाहन बड़े वायु प्रदूषक हैं ही नहीं। दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों का वृहद वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराए बगैर तुगलकी फरमान जारी कर दिल्ली की जनता के मन में भय उत्पन्न कर दिया। पहले दिन लोग इसी भय के कारण वाहन लेकर सड़कों पर नहीं निकले और सरकार ने योजना को सफल करार दे दिया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दुनिया के कई देशों के कई शहरों में सम-विषम योजना लागू है। इस तरह की योजना चीन, जापान, फ्रांस, इटली जैसे देशों और लंदन और न्यूयार्क जैसे शहरों में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कुछ देशों में इस योजना का उलटा परिणाम हुआ। वहां के धनी लोगों ने सम-विषम की नंबर की नई कारें खरीद लीं। इससे वाहनों की संख्या पहले से भी अधिक हो गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम लोगों की आबादी 70 फीसद है। ये लोग सिर्फ एक ही वाहन रखने की क्षमता रखते हैं। सम विषम योजना का सबसे ज्यादा खामियाजा इन्हीं लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सरकार से पूछा है कि उसने महिलाओं और दोपहिया वाहनों को इस योजना से छूट क्यों दी? इसका कारण सरकार को 06 जनवरी को अदालत में देना होगा।

जिन देशों ने अपने यहां सम विषम योजना लागू की उन्होंने जनता को मुफ्त वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराए थे। दिल्ली सरकार ने ऐसी कोई सुविधा जनता को उपलब्ध नहीं कराई है।
गुप्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) ही ड्रामा करने में माहिर है। आप की सरकार जबसे सत्ता में आई है, उसने जनता से किया गया कोई भी वायदा पूरा नहीं किया। यह सरकार पूरी तरह से विफल साबित हो गई है। इसी विफलता को छिपाने के लिए आनन-फानन में सम विषम योजना बगैर सोचे समझे लागू की गई है।

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