एक अपमान के बदले से शुरू हुआ था राजमाता विजयाराजे का गैर-कांग्रेसी सियासी सफर, 36 विधायकों के अपहरण का लगा था आरोप

मध्यप्रदेश कांग्रेस में जब राजमाता विजयाराजे सिंधिया का अपमान हुआ तो उन्होंने कांग्रेस की सरकार गिरा दी थी। इस दौर में ये पहली ऐसी घटना हुई थी, जब 36 विधायकों को होटलों में रखा गया था।

Vijaya raje scindia,
विजया राजे सिंधिया और गोविंद नारायण सिंह (फोटो- Indian Express &govindnarayansingh.org)

हमारे देश की राजनीति में दल बदल करना कोई नई और बड़ी घटना नहीं रह गई है। सरकार बनाने और गिराने के खेल में यह सब किया जाता है। इसे रोकने और गैरकानूनी बनाने के लिए संविधा​न की दसवीं अनुसूची को वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से पारित किया गया था। यह किसी अन्य राजनीतिक दल में दल-बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता का प्रावधान निर्धारित करती है। इसे ‘दल-बदल विरोधी कानून’ के नाम से जाना जाता था। लेकिन मध्यप्रदेश में पहली बार दल-बदल के जरिए ही सरकार गिराई गई थी।

दरअसल 60 के दशक में ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस में हुआ करतीं थीं। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और द्वारका प्रसाद मिश्र मुख्यमंत्री थे। एक दिन एक मीटिंग में डीपी मिश्रा ने राजमाता को इंतजार करा दिया। उस समय हुए एक छात्र आंदोलन के कारण विजयाराजे और सीएम के बीच मनमुटाव चल रहा था। इस इंतजार ने उस मनमुटाव में आग में घी की तरह काम किया और राजमाता इसे अपना अपमान मान बैठीं।

वहां से जब राजमाता लौटीं तो उन्होंने इस अपमान का बदला लेने का ठान लिया और कांग्रेस सरकार के गिराने का भी। विजयाराजे कांग्रेस छोड़ जनसंघ से जा मिलीं और डीपी मिश्रा सरकार को गिराने की तैयारियों में जुट गईं। राजमाता ने इसके लिए कांग्रेस के 36 विधायकों को तोड़ कर अपनी ओर मिला लिया। इसके लिए राजमाता पर पैसे देने का भी आरोप लगा और अपहरण का भी।

‘क्षितिज का विस्तार’ नाम की किताब में मध्यप्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल लिखते हैं कि तब बजट सत्र चल रहा था। वित्तमंत्री कुंजीलाल दुबे ने बजट पेश कर दिया था और उसपर चर्चा चल रही थी। इस दौरान जब शिक्षा पर चर्चा होने लगी तो शिक्षा मंत्री परमानंद भाई पटेल ने लंबा भाषण दिया। इसके बाद मतदान होना था, तब पता चला कि 36 विधायक गायब हैं। जिसके बाद सारी कहानी सामने आ गई।

खबर मिली की 36 विधायकों को राजमाता और जनसंघ ने अपहरण कर लिया है और अज्ञात स्थान पर उन्हें रखा गया है। किताब के अनुसार- गोविंद नारायण सिंह जो बाद में मुख्यमंत्री बने थे, सीढ़ियों पर नोटों से भरा एक सूटकेस लेकर बैठे थे… वो एक व्यक्ति को रोकने की कोशिश कर रहे थे। भागने वाला शख्स एक विधायक था, जो गोविंद नारायण से पैसे नहीं लेना चाहता था। यह घटना बताती है कि उस समय विधायकों की कीमत लगाई जा रही थी। इस घटना को वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी ने अपनी किताब ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश’ में विस्तार से वर्णित किया है।

इन विधायकों को दिल्ली ले जाने से पहले राजमाता ने इम्पीरियल सेबरे होटल में पार्टी दी थी। इसी होटल में देर रात तक विधायकों को तोड़ने की रणनीति गोविंद नारायण सिंह के साथ बनती रही। जब विधायकों की संख्या 36 हो गई तो राजमाता ने उन्हें दो गोपनीय स्थानों पर रखा। उन्होंने विधायकों से कहा- खाना-पीना जो चाहिए वो मिलेगा, यहीं रहो। मैं ग्वालियर से बस मंगवा रही हूं, बाहर खतरा है।

अगले रोज इन विधायकों को राजमाता की बस में बैठाकर ग्वालियर ले जाया गया। बसों के आगे पीछे राजमाता की स्पेशल फोर्स की दर्जनों गाड़ियां आगे पीछे थी। जब ये ग्वालियर पहुंचे तो इनका स्वागत खुली जीप में फूल-मालाओं से हुआ। यहां विधायकों को विजयाराजे ने जयविलास पैलेस में पार्टी दी और फिर वहीं से इन्हीं बसों में बैठाकर दिल्ली भेज दिया गया। दिल्ली में इन विधायकों को फाइव स्टार होटल में ठहराया गया।

राजमाता ने यहां विधायकों की मुलाकात डीपी मिश्रा के पुराने दुश्मन मोरारजी देसाई और यशवंतराव चव्हाण से करवाई। विधायकों को जब वापस भोपाल लाया गया तो फिर विजयाराजे ने अपनी नीजी सुरक्षा में ही इन्हें वापस लेकर आई। विधायकों के आने के बाद डीपी मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ गया।

विजयाराजे सिंधिया के आशीर्वाद से गोविंद नारायण को सीएम की कुर्सी मिल गई। हालांकि गोविंद नारायण के साथ भी राजमाता की बनी नहीं। शुरूआत में तो गोविंद नारायण, राजमाता के सभी आदेशों को मान लेते थे, लेकिन बाद में वो भी इससे तंग आ गए। ये सरकार भी दो साल के अंदर गिर गई।

बता दें कि विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 में हुआ था। आज राजमाता की जयंती है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए कहा- राजे सिंधिया जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनका जीवन पूरी तरह से जन सेवा के लिए समर्पित था। वह निडर और दयालु थीं। अगर भाजपा एक ऐसी पार्टी के रूप में उभरी है जिस पर लोगों को भरोसा है, तो इसका कारण यह है कि हमारे पास राजमाता जी जैसे दिग्गज थे, जिन्होंने लोगों के बीच काम किया और पार्टी को मजबूत किया।’’

राजमाता पहले कांग्रेस, फिर जनसंघ और उसके बाद भाजपा में काफी सक्रिय रहीं। उनकी बेटियां वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे पार्टी भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं, जबकि पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

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