आरजी कर मामले को रविवार को दो साल पूरे हो गए हैं। इस मामले को लेकर पीड़िता की मां और भाजपा की नवनिर्वाचित विधायक रत्ना देबनाथ ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान पूर्व CM ही स्वास्थ्य और पुलिस विभागों की प्रमुख थीं, उन्हीं ने यह सब करवाया था।
रत्ना देबनाथ ने कहा, “मैं अपनी बेटी का नाम लेने और उसकी तस्वीरें सार्वजनिक करने के लिए राष्ट्रपति से अनुमति मांगूँगी क्योंकि उसकी कोई गलती नहीं थी। MBBS के बाद भी उसने अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ नहीं लगाया था। उसने कहा था कि वह ऐसा तभी करेगी जब उसके नाम के साथ कई डिग्रियाँ जुड़ जाएँगी। मुझे न्याय मिलने की 100 फीसदी उम्मीद है, लेकिन मैं अपनी बेटी को कभी वापस नहीं पा सकूँगी।”
ममता बनर्जी ने करवाया- पीड़िता की मां
आगे उन्होंने कहा, “निर्मल घोष, संजीव मुखर्जी और सोमनाथ डे ने ही सबूत का आखिरी हिस्सा भी नष्ट कर दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री ही स्वास्थ्य और पुलिस विभागों की प्रमुख थीं। उन्हीं ने यह सब करवाया था।”
हमने देखा कि कैसे सबूत मिटाए गए- भाजपा मंत्री
आरजी कर मामले पर भाजपा सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी टीएमसी की पूर्व सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “आज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर पूरे बंगाल के सभी अस्पतालों, सरकारी और प्राइवेट हेल्थ सेंटरों, डॉक्टरों, नर्सों, वार्ड बॉय और हेल्थकेयर सिस्टम से जुड़े अधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखा। यह अभया के साथ हुई उस दुखद घटना की दूसरी बरसी है, जिसका RG कर अस्पताल में रेप और मर्डर कर दिया गया था। अभी तक न्याय नहीं मिला है, लेकिन बंगाल में हर कोई इसकी उम्मीद कर रहा है।”
आगे उन्होंने कहा, “हम उस रात वहां मौजूद थे और हमने देखा कि कैसे सबूत मिटाए गए, कैसे सच को दबाने के लिए झूठ का सहारा लिया गया और कैसे अभया के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया।”
टीएमसी ने दिया जवाब
इस मामले पर TMC विधायक कुणाल घोष जवाब देते हुए कहा, “अभया की मौत वाकई दुखद थी, हमने इसकी कड़ी निंदा की। हालांकि, कुछ लोग इस मामले पर सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। ममता बनर्जी की पुलिस ने 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद, जब मामला कोर्ट में गया, तो जांच CBI को सौंप दी गई। CBI जांच कर रही थी और न्यायपालिका के तीन स्तर- ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट- कार्यवाही पर नजर रख रहे थे।”
आगे कहा, “पिछले 2 महीनों में बंगाल में रेप और हत्या की कितनी घटनाएं हुई हैं, उन पर नजर डालिए। फिर भी, उनके लिए एक भी कैंडल मार्च आयोजित नहीं किया गया। स्थिति बहुत चिंताजनक है, लेकिन ये लोग सिर्फ इस खास मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कर रहे हैं।”
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पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बिरजू कोओट की कांचरापारा में पुलिस हिरासत में मौत ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। इसी बीच उनके घर टीएमसी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी परिवार से मुलाकात करने पहुंची, जहां नाराज लोगों ने ममता बनर्जी की गाड़ी पर हमला कर दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
