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जल बचाने का जखनी मॉडल बनाने वाले उमाशंकर पांडेय बने पहले जलयोद्धा, हुए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से सम्मानित

सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में "खेत पर मेड़ मेड़ पर पेड़" तकनीकी से वॉटर कंजर्वेशन के लिए भारत के जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने डेढ़ लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र सौंपा, देश के चार जोनों में से नार्थ जोन में पहला पुरस्कार मिला।

national jal award 2019केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा प्रशस्ति पत्र के साथ उमाशंकर पांडेय।

संजय दुबे

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जखनी गांव निवासी उमाशंकर पांडेय को जलयोद्धा का नार्थ जोन में पहला पुरस्कार मिला है। भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय की ओर से वर्ष 2019 के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार (NWA) के तहत बुधवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में भारत के जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार के रूप में उन्हें डेढ़ लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का आयोजन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया था।

जल संसाधन संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों/संगठनों के लिए पहली बार शुरू किए गए इस सम्मान के तहत देश के चार जोनों में से नार्थ जोन में उत्तर प्रदेश के उमा शंकर पांडेय को पहला जल योद्धा पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर जल शक्ति राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया, जल शक्ति सचिव यूपी सिंह, पद्मभूषण अनिल जोशी, नमामि गंगे के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा सहित देश के तमाम जल विशेषज्ञ मौजूद रहे।

जाने-माने सर्वोदय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता तथा जल ग्राम जखनी के संस्थापक उमा शंकर पांडेय पिछले कई वर्षों से जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में उन्होंने “खेत पर मेड़ मेड़ पर पेड़” की अनोखी तकनीकी से जल संरक्षण का एक बड़ा काम किया है। उन्होंने बिना किसी सहयोग या सरकारी अनुदान के श्रमदान कर अपने गांव जखनी के छह तालाबों, 20 कुओं और दो नालों को परंपरागत स्रोतों से पानी से लबालब कर दिया। उनके इस प्रयास को नीति आयोग, जल शक्ति मंत्रालय और प्रदेश सरकार ने संज्ञान लिया। चित्रकूट मंडल के तत्कालीन कमिश्नर एल. वेंकटेश्वर लू ने उनके गांव जखनी को शासन से जलग्राम घोषित कराया और इस तकनीकी को जखनी मॉडल नाम दिया।

जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए यह राष्ट्रीय जल पुरस्कार भारत सरकार ने पहली बार शुरू किया है। उमा शंकर पांडेय की इस तकनीकी की तमाम वैज्ञानिकों और जल विशेषज्ञों ने सराहना की है। जिस जलस्तर को बढ़ाने के लिए सरकार अरबों रुपए हर वर्ष खर्च कर रही है, उसे जखनी गांव के लोगों ने बिना किसी अनुदान और तकनीकी के सामुदायिक और सहभागिता की भावना के साथ काम करके स्वयं ही बढ़ा लिया। इससे सूखाग्रस्त पूरे बुंदेलखंड में समृद्धि की नई बहार देखने को मिल रही है।

मेड़बंदी तकनीकी की वजह से बुंदेलखंड में गेहूं और धान की पैदावार शुरू हो गई है। भारत सरकार ने जखनी मॉडल को देश के दूसरे हिस्से में भी लागू करने के लिए पहल की है। पुरस्कार मिलने पर उमाशंकर पांडेय ने पीएम मोदी और जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार प्रकट किया है।

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